पारंपरिक गीतों संग अलीगंज में शुरू हुई धान की रोपाई, खेतों में गूंजा गांव का लोकसंगीत

मानसून की दस्तक के साथ अलीगंज प्रखंड के ग्रामीण अंचलों में धान की रोपाई का कार्य पारंपरिक उल्लास के साथ शुरू हो गया है.

अलीगंज. मानसून की दस्तक के साथ अलीगंज प्रखंड के ग्रामीण अंचलों में धान की रोपाई का कार्य पारंपरिक उल्लास के साथ शुरू हो गया है. किसानों ने सदियों पुरानी परंपरा का निर्वहन करते हुए खेती की शुरुआत पारंपरिक गीतों की गूंज के साथ की है, जिससे खेतों का वातावरण पूरी तरह लोकसंगीतमय हो गया है. गांव की महिलाएं खेतों में रोपाई करते समय पारंपरिक गीत जैसे धीरे-धीरे हरवा चलाइहे हरवहवा गिरहत मिलले मुहजोर और नये बाड़े हरवा के कोर… जैसे गीतों को गा रही हैं, जिससे मेहनत के साथ-साथ उत्सव जैसा माहौल भी देखने को मिल रहा है. किसानों ने बताया कि अधिकांश लोगों ने कृषि वैज्ञानिकों की सलाह पर जून माह में ही धान की नर्सरी तैयार कर ली थी. अब लगभग 25 दिन बाद नर्सरी से पौध निकालकर रोपनी का कार्य शुरू कर दिया गया है. जो किसान निजी संसाधनों जैसे बोरिंग और पंपिंग सेट से सिंचाई कर रहे हैं, उन्होंने मानसून के पहले ही खेती शुरू कर दी है. समय पर रोपाई से उन्हें जहां श्रमिक आसानी से मिल जाते हैं, वहीं उपज भी अच्छी होने की संभावना रहती है. ग्रामीण अंचलों में खेती सिर्फ आजीविका का साधन नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक परंपरा भी है, जिसकी झलक इन गीतों और सामूहिक श्रम में साफ देखी जा सकती है.

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By PANKAJ KUMAR SINGH

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