अगर आप बिहार-झारखंड को जोड़ने वाले एनएच-333 (जमुई-चकाई मुख्य मार्ग) से गुजरने की तैयारी में हैं, तो जरा संभल जाइए. यह राष्ट्रीय राजमार्ग इन दिनों सफर के लिए कम और हादसों के लिए ज्यादा जाना जा रहा है.
सोनो बाजार से लेकर काली पहाड़ी और बटिया घाटी तक सड़क की गिट्टियां बिखर चुकी हैं और बीच सड़क पर जानलेवा गड्ढों का जाल बिछ गया है. हाल ही में इन्हीं गड्ढों की वजह से एक दर्दनाक हादसे में पिता-पुत्री अपनी जान गंवा चुके हैं, फिर भी सड़क की मरम्मत को लेकर जिम्मेदार महकमा लापरवाह बना हुआ है.
बरसात में गड्ढे बने 'अदृश्य कुआं', गाड़ियों का हो रहा भारी नुकसान
मौजूदा मानसूनी बारिश ने हाईवे की बदहाली को और अधिक भयावह बना दिया है:
- गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल: गड्ढों में गंदा पानी भर जाने के कारण वाहन चालकों को यह समझ ही नहीं आता कि गड्ढा कितना गहरा है.
- गाड़ियों के सस्पेंशन टूटे: तेज गति से गुजरने वाली गाड़ियां सीधे इन गड्ढों में गिरती हैं, जिससे वाहनों के टायर फटने, सस्पेंशन टूटने और अनियंत्रित होकर पलटने का जोखिम हर पल बना रहता है.
- बाइक सवारों पर सबसे बड़ा संकट: दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह सड़क किसी मौत के जाल से कम नहीं है; जरा सा पहिया फिसला नहीं कि बाइक सवार सीधे बड़े वाहनों के नीचे आ जाते हैं.
काली पहाड़ी और बटिया घाटी: सबसे खतरनाक ब्लैक स्पॉट
हाईवे के इस हिस्से में सफर करना सबसे ज्यादा डरावना साबित हो रहा है:
- काली पहाड़ी चौक: यहां बीच सड़क पर बेहद बड़े-बड़े गड्ढे हो चुके हैं. कम ग्राउंड क्लीयरेंस वाली छोटी चार पहिया गाड़ियां यहां नीचे से टकराकर बुरी तरह फंस रही हैं.
- बटिया घाटी व चिरेन पुल: घाटी में पहले से ही तीखे मोड़ और ढलान हैं. चिरेन पुल के समीप बने गहरे गड्ढों से बचने के लिए गाड़ियां अचानक गलत दिशा (रॉन्ग साइड) में मुड़ती हैं.
- हादसे में गई जान: बीते सोमवार को इसी चिरेन पुल के पास गड्ढे से बचने के चक्कर में एक हाइवा ने बाइक को रौंद दिया था, जिसमें पिता और पुत्री की दर्दनाक मौत हो गई थी.
रात के अंधेरे में बढ़ जाती है दहशत, तुरंत मरम्मत की मांग
घाटी और पहाड़ी रास्तों पर रात में पर्याप्त स्ट्रीट लाइट न होने से अंधेरे में पानी भरे गड्ढे नजर ही नहीं आते.
स्थानीय ग्रामीणों, बस-ट्रक चालकों और समाजसेवियों ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि एनएच-333 के इस पूरे हिस्से का तत्काल तकनीकी निरीक्षण किया जाए और पत्थरों-डामर से इसकी पक्की मरम्मत कराई जाए, ताकि आए दिन हो रही मौतों का सिलसिला थम सके.
