एनएच-333ए पर नरियाना-मांगोबंदर पुल के पास डायवर्सन का काम फिर शुरू: जमीन विवाद सुलझा

राष्ट्रीय राजमार्ग-333ए पर क्षतिग्रस्त नरियाना और मांगोबंदर पुलों के लिए डायवर्सन का निर्माण कार्य फिर से गति पकड़ चुका है. जमीन संबंधी विवाद के समाधान के बाद, ₹12.5 करोड़ की लागत से बन रहा यह डायवर्सन इलाके के लिए बड़ी राहत लेकर आया है. इसके बनने से दो दर्जन से अधिक गांवों का संपर्क फिर से बहाल होगा.

राष्ट्रीय राजमार्ग-333ए (NH-333A) पर क्षतिग्रस्त नरियाना और मांगोबंदर पुल के समानांतर बनने वाले डायवर्सन का निर्माण कार्य एक बार फिर तेजी से शुरू हो गया है. जमीन संबंधी विवाद के कारण कुछ दिनों से ठप पड़ा निर्माण कार्य दोबारा शुरू होने से इलाके की आबादी में भारी राहत देखी जा रही है. बुधवार को निर्माण स्थल पर मजदूरों द्वारा आरसीसी ढलाई का कार्य किया गया, वहीं ट्रकों के जरिए बड़े-बड़े ह्यूम पाइप भी मौके पर पहुंचा दिए गए हैं.

₹12.5 करोड़ की लागत से बनेगा मजबूत डायवर्सन

एनएचएआई (NHAI) द्वारा बनाए जा रहे इस डायवर्सन को लेकर तकनीकी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं:

  • मजबूत संरचना: डायवर्सन में दो से तीन लेयर तक बड़े ह्यूम पाइप बिछाए जाएंगे, ताकि मानसूनी बारिश में नदी का जलस्तर बढ़ने पर भी डायवर्सन बहने का खतरा न रहे और आवागमन सुरक्षित बना रहे.
  • रखरखाव की जिम्मेदारी: करीब 12.5 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस डायवर्सन के निर्माण के साथ ही एजेंसी को अगले 5 वर्षों तक इसके रख-रखाव (Maintenance) की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है.
  • जमीन विवाद का समाधान: निर्माण शुरू होने पर एक स्थानीय व्यक्ति ने अपनी निजी जमीन का दावा करते हुए आपत्ति जताई थी, जिससे काम रुक गया था. प्रशासनिक पहल के बाद अब बाधा दूर कर ली गई है.

7 मई से बंद है परिचालन, 30 किमी घूमकर जाने को मजबूर हैं लोग

सुरक्षा कारणों से 7 मई से ही दोनों पुलों पर सभी प्रकार के वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रोक दी गई थी:

  • क्यों बंद हुए थे पुल?: नरियाना पुल का एक पिलर अचानक धंसने से उसका मध्य भाग नीचे चला गया था और स्लैब दो हिस्सों में टूट गया था. वहीं पास स्थित मांगोबंदर पुल को भी अति-जर्जर स्थिति के कारण असुरक्षित घोषित कर बैरिकेडिंग कर दी गई थी.
  • 30 किमी का अतिरिक्त फेरा: एनएच-333ए बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल को आपस में जोड़ने वाला अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है. पुल बंद होने से यात्रियों और मालवाहक वाहनों को करीब 30 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा था.

दो दर्जन से अधिक गांवों का मुख्यालय से कटेगा संपर्क संकट

पुल बंद रहने से दोनों पुलों के बीच बसे दो दर्जन से अधिक गांवों का जिला एवं प्रखंड मुख्यालय से सीधा संपर्क कट गया था, जिससे आम जीवन अस्त-व्यस्त हो गया था.

स्थानीय लोगों का कहना है कि नए स्थायी पुलों के निर्माण में लंबा समय लगेगा. ऐसे में इस मजबूत अस्थायी डायवर्सन का तेजी से निर्माण पूरा होना क्षेत्र की लाइफलाइन को फिर से पटरी पर ले आएगा. ग्रामीणों ने जल्द से जल्द काम पूरा कर यातायात बहाल करने की मांग की है.


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लेखक के बारे में

गुलशन कश्यप प्रिंट माध्यम में 15 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सामाजिक सरोकार, शिक्षा, अनुसंधान, राजनीति, कला-संस्कृति व सिनेमा में रुचि रखते हैं.

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