42 वर्षों से मुफ्त शिक्षा देकर ज्ञान का प्रकाश फैला रहे हैं गुरुवर नंदलाल

कुछ शिक्षक आज भी अपने निस्वार्थ भाव से समाज में मिसाल कायम कर रहे हैं. ऐसे ही एक आदर्श शिक्षक हैं चकाई प्रखंड के खास चकाई निवासी 70 वर्षीय गुरुवर नंदलाल दुबे. वे पिछले 42 वर्षों से गरीब, वंचित और दलित बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा देकर ज्ञान का दीप जला रहे हैं.

जयकुमार शुक्ला,

चकाई

बदलते दौर में जहां शिक्षा को व्यवसाय बना लिया गया है, वहीं कुछ शिक्षक आज भी अपने निस्वार्थ भाव से समाज में मिसाल कायम कर रहे हैं. ऐसे ही एक आदर्श शिक्षक हैं चकाई प्रखंड के खास चकाई निवासी 70 वर्षीय गुरुवर नंदलाल दुबे. वे पिछले 42 वर्षों से गरीब, वंचित और दलित बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा देकर ज्ञान का दीप जला रहे हैं. जमुई जिले के रतनपुर गांव में जन्मे नंदलाल दुबे पिछले 37 वर्षों से खास चकाई में रहकर शिक्षा दान की परंपरा निभा रहे हैं. उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ नहीं होने के बावजूद वे निःस्वार्थ भाव से बच्चों को पढ़ा रहे हैं. नंदलाल दुबे ने 1972 में अखिलेश्वर उच्च विद्यालय रतनपुर से मैट्रिक पास किया. इसके बाद इंटर की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने दो वर्षों तक उसी विद्यालय में बच्चों को निशुल्क पढ़ाया. उन्होंने चकाई प्रखंड के उच्च विद्यालय कोरानेय में चार साल और चकाई उच्च विद्यालय में एक साल तक शिक्षण कार्य भी किया. आज भी ढलती उम्र में उनमें बच्चों को पढ़ाने की वही ललक है. जिन गरीब व दलित परिवारों के माता-पिता आर्थिक तंगी के कारण अपने बच्चों को महंगे विद्यालयों में नहीं भेज पाते, उन बच्चों को मुफ्त शिक्षा देकर गुरुवर नंदलाल ने गुरु परंपरा को नयी दिशा दी है. उन्होंने यह साबित किया है कि सच्चा शिक्षक वही है, जो समाज को रोशनी देने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दे.

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By PANKAJ KUMAR SINGH

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