बरहट, जमुई से शशि लाल की रिपोर्ट :
लोहिया स्वच्छ अभियान और स्वच्छ भारत मिशन फेज-2 के तहत गांवों को साफ-सुथरा बनाने के बड़े-बड़े दावे नुमर पंचायत में धराशायी होते दिख रहे हैं. यहां लाखों रुपये खर्च कर बनाया गया कचरा प्रबंधन अपशिष्ट इकाई महज तीन साल में ही जर्जर होकर बेकार साबित हो रहा है. हालत यह है कि जिस यूनिट से गांव की सफाई व्यवस्था दुरुस्त होनी थी.वही आज बदहाली और लापरवाही की कहानी बयां कर रहा है.उड़ चुके हैं टीन, दीवारों में भी आयी चौड़ी दरारें
इकाई की छत पर लगे टिन हवा में उड़ चुके हैं. दीवारों में चौड़ी दरारें पड़ गई हैं और कई हिस्से ढह चुके हैं. इतनी जल्दी निर्माण का यह हाल होना सीधे तौर पर निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है.ग्रामीणों का आरोप है कि घटिया सामग्री और लापरवाही के कारण यह परियोजना शुरू होने से पहले ही दम तोड़ चुकी है.वहीं यूनिट के बदहाल होने का सीधा असर सफाई व्यवस्था पर पड़ा है. पंचायत में नियमित कचरा उठाव बंद जैसा हो गया है.जिससे गांव की गलियां फिर से कचरे जमा हैं. ग्रामीण जितेंद्र पासवान, मनोज कुमार और विनोद यादव बताते हैं कि कभी-कभार कचरा उठाया भी जाता है तो उसे यूनिट में डालने के बजाय बाहर ही फेंक दिया जाता है. नतीजा यह कि प्लास्टिक और कचरा हवा के साथ उड़कर घरों तक पहुंच रहा है और तो और, यूनिट के बाहर ही कचरा जलाने का सिलसिला भी जारी है.जिससे पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों पर खतरा मंडरा रहा है. ग्रामीणों ने कहा कि जिस यूनिट पर लाखों रुपये खर्च किए गए, वह हल्की हवा भी नहीं झेल सका छत उड़ गई और दीवारें गिर गईं.इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों और संवेदकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.वहीं प्रखंड स्वच्छता समन्वयक सुमित कुमार रावत ने मामले से अनभिज्ञता जताते हुए कहा कि वे हाल ही में पदस्थापित हुए हैं और जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी.
क्या कहते हैं अधिकारी
इस संबंध में प्रखंड मनरेगा कार्यक्रम पदाधिकारी योगेंद्र सिंह ने कहा कि कचरा प्रबंधन यूनिट की गुणवत्ता की जांच कराई जाएगी. इतनी जल्दी संरचना कैसे जर्जर हुई, इसकी भी पड़ताल होगी. जांच में जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी.
