बरहट (जमुई). प्रखंड क्षेत्र के मलयपुर गांव स्थित ऐतिहासिक श्रीश्री 108 राधा कृष्ण मंदिर में जन्माष्टमी की रात आस्था और उल्लास का ऐसा संगम दिखा कि पूरा मंदिर परिसर कृष्ण भक्ति में डूब गया. रंग-बिरंगी झालरों और आकर्षक रोशनी से सजा मंदिर श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहा. मध्यरात्रि में जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का समय आया, मंदिर परिसर हरे कृष्ण और गोविंद जय जय के जयकारों से गूंज उठा. आचार्य अनिल कुमार मिश्रा के वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच विधिवत पूजा-अर्चना संपन्न कराई गई. यजमान के रूप में श्रीकांत मिश्रा और पूजा मिश्रा शामिल हुए.
मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के साथ भव्य आरती हुई
मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के साथ भव्य आरती हुई. आरती के दौरान श्रद्धालु भक्ति में झूमते नजर आए और जयकारों से वातावरण को भक्तिमय बना दिया. पूजा-अर्चना और आरती के बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया.बड़ी संख्या में लोगों ने मंदिर पहुंचकर भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन किए और सुख-समृद्धि की कामना की.परंपरा के अनुसार जन्माष्टमी के बाद भगवान श्रीकृष्ण का छठियारी उत्सव भी मनाया जाएगा. ब्रिटिश काल से जुड़ा है मंदिर का इतिहास स्थानीय श्रद्धालु राजेश कुमार, मनीष कुमार बरनवाल, शंभु मिश्रा और बिनोद कुमार सिंह ने बताया कि यह बरहट प्रखंड का एकमात्र ऐतिहासिक राधा-कृष्ण मंदिर है. श्रद्धालुओं के अनुसार मंदिर की स्थापना ब्रिटिश काल में मलयपुर निवासी पुरोहित पुनीत मिश्रा ने की थी. समय के साथ मंदिर क्षेत्र की धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया. मन्नत पूरी होने की है मान्यता मंदिर को लेकर स्थानीय लोगों में गहरी आस्था है. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से भगवान राधा-कृष्ण की पूजा करने और मन्नत मांगने पर मनोकामना पूरी होती है. मंदिर परिसर में राधा-कृष्ण की प्रतिमा के अलावा श्रीराम-सीता, लक्ष्मण, बजरंगबली और भगवान शंकर की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं.जन्माष्टमी के मौके पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने मंदिर की धार्मिक महत्ता को एक बार फिर जीवंत कर दिया.
