मानसून में निखरी जमुई के 'पंचभूर झरने' की रंगत: बिहार-झारखंड से उमड़ रहे पर्यटक

Panchbhur Waterfall: जमुई जिले के खैरा प्रखंड स्थित गिद्धेश्वर पहाड़ी की वादियों में छुपा 'पंचभूर झरना' इन दिनों अपने सबसे खूबसूरत शबाब पर है. मानसून की झमाझम बारिश के बाद इस प्राकृतिक झरने का जलप्रवाह तेजी से बढ़ गया है, जिसे देखने और प्रकृति के बीच सुकून के पल बिताने के लिए बिहार के साथ-साथ पड़ोसी राज्य झारखंड से भी बड़ी संख्या में सैलानी पहुंच रहे हैं.

Panchbhur Waterfall: घने जंगलों और ऊंची पहाड़ियों के बीच से कल-कल करती दूधिया जलधारा पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र बनी हुई है. कभी माओवादी डर की वजह से वीरान रहने वाला यह इलाका अब पूरी तरह शांत और सुरक्षित हो चुका है, जहां लोग परिवार के साथ बेखौफ होकर पहुंच रहे हैं. यह झरना न केवल पर्यटन, बल्कि स्थानीय हरणी पंचायत के किसानों के लिए लाइफलाइन (सिंचाई का मुख्य स्रोत) साबित हो रहा है.

घने जंगलों के बीच सेल्फी और रील्स बनाने का क्रेज

गिद्धेश्वर पहाड़ी क्षेत्र के जंगलों में चारों ओर फैली हरियाली और झरने की गूंजती आवाज पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर रही है. चिलचिलाती धूप और उमस भरी गर्मी से राहत पाने के लिए युवा, बुजुर्ग और बच्चे झरने के ठंडे पानी में अठखेलियां करते नजर आ रहे हैं. सप्ताहांत (वीकेंड) और सरकारी छुट्टियों के दिनों में यहां का नजारा किसी बड़े पिकनिक स्पॉट जैसा हो जाता है. प्राकृतिक सुंदरता के बीच लोग जमकर रील्स, वीडियो और यादगार तस्वीरें सोशल मीडिया के लिए साझा कर रहे हैं.

हरणी पंचायत के खेतों की प्यास बुझाता है यह झरना

पंचभूर झरना केवल मनोरंजन और सैर-सपाटे का केंद्र नहीं है, बल्कि आर्थिक रूप से भी यह क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है. झरने से निकलने वाला पानी नीचे मैदानी इलाकों में बहते हुए हरणी पंचायत के कई गांवों तक पहुंचता है. स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, इसी पानी के जरिए खेतों की पटवन (सिंचाई) की जाती है, जिससे विपरीत मौसम में भी फसलें सूखने से बच जाती हैं. इस मानसूनी जलप्रवाह से किसान बेहद खुश हैं क्योंकि उन्हें धान की रोपनी के लिए भरपूर पानी मिल रहा है.

खौफ के साए से बाहर निकला पंचभूर, ग्रामीणों ने बयां की हकीकत

स्थानीय ग्रामीण सुनील मरांडी, शोभन हांसदा और बड़की सोरेन ने बताया कि एक दशक पूर्व तक यह पूरा क्षेत्र लाल गलियारे (माओवादी गतिविधियों) के प्रभाव में था, जिसके चलते लोग दिन के उजाले में भी इधर आने की हिम्मत नहीं जुटा पाते थे. लेकिन अब प्रशासन और सुरक्षा बलों की मुस्तैदी से स्थिति 180 डिग्री बदल चुकी है. नक्सली खौफ पूरी तरह खत्म होने से अब दूर-दराज के राज्यों से भी लोग सपरिवार बेझिझक प्राकृतिक सौंदर्य का लुत्फ उठाने आ रहे हैं.

डीएम नवीन की पहल: इको-टूरिज्म हब के रूप में विकसित करने की तैयारी

पंचभूर झरने की बढ़ती लोकप्रियता और अद्भुत भौगोलिक स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन इसे बिहार के नक्शे पर एक बड़े इको-टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने की योजना पर काम कर रहा है.

"बीते मार्च महीने में जिलाधिकारी नवीन के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रशासनिक टीम ने पंचभूर झरने का भौतिक निरीक्षण किया था. झरने तक पहुंचने के लिए बेहतर संपर्क सड़क (अप्रोच रोड), पर्यटकों के बैठने की व्यवस्था, पेयजल और सुरक्षा जैसे बुनियादी ढांचे के विकास का खाका तैयार किया जा चुका है. इस मास्टर प्लान के धरातल पर उतरते ही यह जमुई का सबसे बड़ा पर्यटन केंद्र बनेगा."

यदि सरकारी स्तर पर इन बुनियादी सुविधाओं को जल्द पूरा कर लिया जाता है, तो पंचभूर आने वाले समय में न केवल जमुई बल्कि पूरे बिहार के पर्यटन राजस्व को बढ़ाने और स्थानीय आदिवासियों को रोजगार देने में मील का पत्थर साबित होगा.


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लेखक के बारे में

Author: Gulshan kashyap

Published by: Divyanshu Prashant

गुलशन कश्यप प्रिंट माध्यम में 15 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सामाजिक सरोकार, शिक्षा, अनुसंधान, राजनीति, कला-संस्कृति व सिनेमा में रुचि रखते हैं.

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