बरहट (जमुई) से शशिलाल की रिपोर्ट. कभी समाज सेवा, खादी आंदोलन और गांधीवादी विचारधारा का मुख्य केंद्र रहा बरहट का ऐतिहासिक ‘श्रम भारती खादीग्राम’ अब डिजिटल युग में एक नए रूप में सामने आ रहा है. सोशल मीडिया की दुनिया में यह परिसर युवाओं का सबसे पसंदीदा ‘रील्स स्पॉट’ बन चुका है. प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक छटा से घिरे इस परिसर में हर दिन सैकड़ों युवक-युवतियां इंस्टाग्राम रील्स, फोटोशूट और वीडियो बनाने के लिए जुट रहे हैं.
प्राकृतिक वातावरण युवाओं को कर रहा आकर्षित
जमुई-खड़गपुर मुख्य मार्ग से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित खादीग्राम अपनी शांति, चारों ओर फैली हरियाली, छोटी पहाड़ियों और पुराने भवनों के कारण रील मेकर्स के लिए परफेक्ट बैकग्राउंड साबित हो रहा है. सुबह से लेकर शाम तक यहां मोबाइल कैमरों और म्यूजिक की गूंज सुनाई देती है. स्थानीय युवा ही नहीं, बल्कि कई क्षेत्रीय कलाकार भी यहां शॉर्ट फिल्म और वीडियो एल्बम की शूटिंग करने आ रहे हैं.
वायरल रील्स ने बढ़ाई खादीग्राम की लोकप्रियता
हाल ही में पटना की एक जानी-मानी इंस्टाग्राम क्रिएटर अंजलि डिसाइड द्वारा खादीग्राम में बनाया गया एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ. इस वीडियो में उन्होंने यहाँ के सुकून भरे माहौल और प्राकृतिक सौंदर्य की काफी सराहना की थी. इस वीडियो के वायरल होने के बाद से ही यहां आने वाले युवाओं की तादाद में भारी इजाफा देखा जा रहा है.
जहां गूंजती थी गांधीवाद की आवाज, वहां अब बज रहे फिल्मी गाने
खादीग्राम का एक गौरवशाली इतिहास रहा है. एक दौर था जब यह परिसर समाज सुधार, स्वावलंबन और महात्मा गांधी के सिद्धांतों पर चर्चा का मुख्य केंद्र हुआ करता था. आज उसी परिसर में फिल्मी गानों की धुनों पर रील्स बनाई जा रही हैं. समाज के बुद्धिजीवियों का एक वर्ग इसे बदलते समय की तस्वीर मान रहा है, तो वहीं कुछ लोगों का कहना है कि यह युवाओं को अपनी ऐतिहासिक विरासत से जोड़ने का एक नया जरिया बन सकता है.
उपेक्षा का शिकार हो रहा ऐतिहासिक धरोहर
सामाजिक चेतना का गवाह रहा खादीग्राम आज प्रशासनिक अनदेखी और बदहाली के आंसू बहा रहा है. परिसर के कई ऐतिहासिक और पुराने भवन जर्जर अवस्था में पहुंच चुके हैं. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा के आसपास बना सुरक्षा घेरा भी टूट चुका है. सही रखरखाव न होने के कारण यह धरोहर धीरे-धीरे अपनी चमक खोती जा रही है.
स्वतंत्रता सेनानियों से जुड़ा है गौरवशाली इतिहास
श्रम भारती खादीग्राम की स्थापना 23 मार्च 1959 को स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय नृसिंह प्रसाद विश्वास द्वारा की गई थी. यह स्थल विनोबा भावे, आचार्य रामकृष्णमूर्ति और तुषार गांधी जैसे महान व्यक्तित्वों की कर्मभूमि और प्रवास का गवाह रहा है. स्थानीय निवासियों और सर्व सेवा संघ के प्रतिनिधि संजीव कुमार ने जिला प्रशासन से इस ऐतिहासिक स्थल के संरक्षण और सौंदर्यीकरण की मांग की है, ताकि खादीग्राम केवल एक मनोरंजन या रील्स बनाने का केंद्र न बनकर अपनी वास्तविक ऐतिहासिक पहचान को जिंदा रख सके.
