जेपी सेनानियों ने उठायी सुविधाएं लागू करने की मांग
जेपी सेनानियों ने सरकार से बिहार गजट में किये गये सभी प्रावधानों को लागू करने की मांग उठायी है
खैरा.
जेपी सेनानियों ने सरकार से बिहार गजट में किये गये सभी प्रावधानों को लागू करने की मांग उठायी है. जमुई जिला जेपी सेनानी संघ की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि लोकतंत्र और जनता के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए चले आंदोलन में बड़ी संख्या में छात्रों और युवाओं ने हिस्सा लिया था. आंदोलन के दौरान कई लोगों को मीसा और डीआइआर के तहत नजरबंद किया गया, जबकि कई छात्र पुलिस फायरिंग में मारे गये और कई घायल हुए थे. 25 जून 1975 को देश में लगाये गये आपातकाल के दौरान समाचार पत्र, आकाशवाणी, दूरदर्शन और न्यायपालिका तक पर प्रतिबंध लगाये गये थे, बावजूद इसके आंदोलन को और तेज किया गया. जेपी सेनानियों ने कहा कि बिहार सरकार ने 17 जुलाई 2015 को बिहार गजट के माध्यम से जेपी सेनानियों को सम्मान पेंशन और राज्य परिवहन बसों में मुफ्त यात्रा जैसी सुविधाएं देने का प्रावधान किया था, जिसका लाभ मिल रहा है. लेकिन गजट में किये गये अन्य कई प्रावधान अब तक लागू नहीं किये गये हैं. प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि जेपी सेनानियों की पत्नियों को परिचय पत्र देने, भूमिगत रहकर आंदोलन में सहयोग करने वालों को प्रशस्ति पत्र और प्रतीक चिह्न देने जैसे प्रावधान आज तक अधूरे हैं. सिगारी टांड़ निवासी नागेश्वर साव का उदाहरण देते हुए बताया गया कि 19 मार्च 1974 को जमुई गोलीकांड में गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्हें आज तक कोई सम्मान या विशेष सुविधा नहीं मिली. घायल अवस्था में वर्षों तक इलाजरत रहने के बावजूद वे सरकारी सहायता से वंचित रहे. जमुई जिला जेपी सेनानी संघ के अध्यक्ष शिवनंदन सिंह समेत राजेश सिंह, रंजन सिंह, भूषण सिंह, सियाराम मंडल और श्यामसुंदर सिंह ने सरकार से मांग की कि बिहार गजट में वर्णित सभी सुविधाओं को शीघ्र लागू किया जाए. उन्होंने सरकारी बसों में यात्रा के दौरान एक सहचर की भी व्यवस्था करने और जरूरतमंद जेपी सेनानियों के लिए बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की. जेपी सेनानियों ने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले लोगों को सम्मान और सुविधाएं मिलनी चाहिए, ताकि नई पीढ़ी भी लोकतांत्रिक मूल्यों से प्रेरणा ले सके.