Jamui news : आसान नहीं थी अरुण कुमार भारती के लिए जमुई की लड़ाई

Jamui news : भले ही चुनाव अरुण कुमार भारती लड़ रहे थे, पर चुनाव में इस बार भी चेहरा चिराग पासवान ही रहे.

Jamui news : पूर्व उपमुख्यमंत्री व राजद के स्टार प्रचारक तेजस्वी यादव ने जमुई में ताबड़तोड़ सभाएं की. तेजस्वी यादव ने सबसे अधिक सभा का रिकॉर्ड भी जमुई लोकसभा क्षेत्र में बना दिया. उन्होंने जमुई लोकसभा क्षेत्र में 13 सभाएं कीं, बावजूद जमुई से चिराग पासवान के बहनोई अरुण कुमार भारती चुनाव जीतने में सफल रहे. लोग कह रहे हैं कि चिराग पासवान की इमेज के कारण जमुई लोकसभा सीट पर नवोदित प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रहे अरुण कुमार भारती के सिर जीत का सेहरा बंधा है. मोदी फैक्टर के साथ-साथ राम मंदिर व कई अन्य राष्ट्रीय मुद्दे भी इस चुनाव में हावी रहे. भाजपा, जनता दल (यू) और लोक जनशक्ति पार्टी (रा) इस बार जमुई में जातीय समीकरण साधने में भी सफल रही. राजद ने इस चुनाव में बाहरी बनाम स्थानीय की लड़ाई बनाने की पुरजोर कोशिश की. कहा गया कि जीतने के बाद अरुण कुमार भारती कभी जमुई में नजर ही नहीं आएंगे. उनसे उनका एड्रेस तक पूछा गया, लेकिन ये फैक्टर काम नहीं आये.

चिराग पासवान की साफ छवि ने डाला असर

लोक जनशक्ति पार्टी के संस्थापक रहे रामविलास पासवान के पुत्र चिराग पासवान ने जमुई से ही अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी. पहली बार उन्होंने 2014 में जमुई से चुनाव जीता था. इसके बाद 2019 में भी जमुई सीट से ही सांसद बने तथा 2024 में हाजीपुर चले गये. ऐसे में उन्होंने अपने बहनोई को जमुई सीट पर चुनाव लड़ाने का निर्णय लिया. भले ही चुनाव अरुण कुमार भारती लड़ रहे थे, पर चुनाव में इस बार भी चेहरा चिराग पासवान ही रहे और लोगों ने चिराग के चेहरे पर एक बार फिर से भरोसा जताया. चिराग भी अपने किये गये कार्यों को लेकर ही चुनाव मैदान में उतरे थे. उन्होंने कहा था कि वह एक नहीं, बल्कि दो सीटों के सांसद हैं. भले ही वह हाजीपुर से चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन वह हमेशा जमुई के सांसद के रूप में काम करते रहेंगे और यह लोगों को उनकी तरफ मोड़ने में सही साबित हुआ. राजद समर्थकों का गाली कांड जमुई लोकसभा सीट के लिए 19 अप्रैल को वोट डाले गये थे. उसके ठीक दो दिन पहले लोक जनशक्ति पार्टी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एक ऐसा वीडियो जारी किया था, जिसमें राजद समर्थकों द्वारा चिराग पासवान और उनके परिवार को लेकर गाली-गलौज की गयी. वह वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था और चिराग पासवान इसको मुद्दा बनाकर चुनाव में गये थे. शुरुआती दौर में अर्चना कुमारी अच्छी गति में दिख रही थीं, लेकिन राजद समर्थकों के गाली कांड ने वोटरों को दोबारा सोचने पर मजबूर कर दिया और राजद को वोट डालने का मन बना चुके लोग भी वापस एनडीए की तरफ मुड़ते चले गये.

मोदी की सभा के बाद बना सकारात्मक माहौल

मोदी की सभा के बाद बना सकारात्मक माहौल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बिहार में अपने चुनावी सभा की शुरुआत जमुई से ही की थी. पीएम मोदी की सभा के बाद जमुई में अरुण कुमार भारती के प्रति सकारात्मक माहौल बना था और उसका भी लाभ एनडीए प्रत्याशी को मिला. इसमें पीएम समेत मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, डिप्टी सीएम विजय कुमार सिंह व सम्राट चौधरी से लेकर एनडीए के तमाम घटक दलों के नेता शामिल हुए थे. पीएम की सभा के बाद जिले में बना माहौल अरुण कुमार भारती के काफी काम आया.

पार्टियों का जातीय समीकरण भी आया काम

जमुई में एनडीए का जातीय समीकरण भी काफी काम आया. जमुई सुरक्षित लोकसभा सीट होने के बावजूद यहां अति पिछड़ा और सवर्ण वोटरों को साधने की कोशिश की गयी. भाजपा ने सवर्ण वोटरों को साधने के लिए गृह मंत्री राजनाथ सिंह, डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा, तो कुशवाहा वोटरों को साधने के लिए डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को चुनाव मैदान में उतारा. हालांकि जमुई में माई समीकरण को तोड़ पाने में ये असफल रहे, लेकिन सवर्ण और अति पिछड़ा वोटरों के साथ-साथ महादलित वोटरों के साथ ने अरुण कुमार भारती की जीत आसान कर दी. जदयू के एनडीए में शामिल होने के बाद अरुण कुमार भारती के लिए जमुई सीट में थोड़ी सी मदद मिली और अत्यंत पिछड़ा वोटरों के सहयोग से उन्होंने इस सीट पर विजय हासिल कर ली.

आम लोगों में पहुंच भी बना कारण

चिराग पासवान ने अपने 10 साल के कार्यकाल में लोगों के बीच अपनी पहुंच बनाये रखी. लोकसभा में उपस्थिति के साथ-साथ वह अपने लोकसभा क्षेत्र में भी उपस्थित रहे और यह बात भी एक फैक्टर के रूप में उनके बहनोई के लिए जमुई में काफी उपयोगी साबित हुई. आम लोगों के बीच उनकी पहुंच ने इस लड़ाई को के पलड़े को उनकी ओर झुका दिया. लोगों ने कहा कि एक सांसद के रूप में चिराग पासवान की छवि जैसी रही है, उनके बहनोई से भी लोगों की यही उम्मीद है.

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