जमुई से अर्जुन अरनव की रिपोर्ट :
जमुई सदर अस्पताल परिसर में लाखों रुपये की लागत से बनाया गया हर्बल पार्क आज बदहाली और उपेक्षा की मार झेल रहा है. अस्पताल के एसएनसीयू और इमरजेंसी कक्ष के समीप स्थित यह पार्क अब गंदगी और अव्यवस्था का प्रतीक बन चुका है. चारों तरफ फैले कचरे और सूखते पौधों ने पार्क की पूरी तस्वीर बदल दी है.स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस पार्क को अस्पताल परिसर को स्वच्छ और हराभरा बनाने के उद्देश्य से विकसित किया गया था. वही आज देखरेख के अभाव में अपनी पहचान खोता जा रहा है. अस्पताल आने वाले मरीज और उनके परिजन भी इस बदहाल स्थिति को देखकर नाराजगी जता रहे हैं.औषधीय पौधों की जगह दिख रही अव्यवस्था
जानकारी के अनुसार तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ अजय कुमार भारती के कार्यकाल में तत्कालीन जिलाधिकारी के निर्देश पर इस हर्बल पार्क का निर्माण कराया गया था. पार्क में हरसिंगार. इंसूलिन प्लांट. हर्रे समेत कई औषधीय महत्व वाले पौधे लगाए गए थे.शुरुआती दिनों में यह पार्क लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ था. मरीज और उनके परिजन यहां बैठकर हरियाली का आनंद लेते थे और औषधीय पौधों के बारे में जानकारी भी प्राप्त करते थे. लेकिन समय के साथ पार्क की देखरेख पूरी तरह बंद हो गई. अब हालत यह है कि कई पौधे सूख चुके हैं और जगह-जगह गंदगी फैली हुई है.
सरकारी राशि के दुरुपयोग का आरोप
स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं. लोगों का कहना है कि लाखों रुपये खर्च कर पार्क का निर्माण तो करा दिया गया. लेकिन उसके संरक्षण और रख-रखाव की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की गई.लोगों ने आरोप लगाया कि सरकारी राशि खर्च होने के बावजूद पार्क की वर्तमान स्थिति बेहद खराब है. इसे सरकारी धन की बर्बादी और लापरवाही का उदाहरण बताया जा रहा है.पार्क के पुनर्विकास और साफ-सफाई की मांग
अस्पताल आने वाले मरीजों और उनके परिजनों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से पार्क की साफ-सफाई और पुनर्विकास की मांग की है. लोगों का कहना है कि अस्पताल परिसर में स्वच्छता और हरियाली बनाए रखना जरूरी है.स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि पार्क की नियमित देखरेख सुनिश्चित की जाए और सूख चुके पौधों की जगह नए पौधे लगाए जाएं. ताकि अस्पताल परिसर फिर से स्वच्छ और हराभरा दिखाई दे सके.
