जमुई से अर्जुन अरनव की रिपोर्ट:
Jamui Environment Awareness Campaign: पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जमुई जिले में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया गया. इस दौरान जिले के विभिन्न प्रखंडों में वृक्षारोपण, जागरूकता रैली, परिचर्चा, सांस्कृतिक कार्यक्रम और पर्यावरण रथ के माध्यम से लोगों को प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया गया. कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों, न्यायिक एवं प्रशासनिक अधिकारियों, विद्यार्थियों, किसानों तथा सामाजिक संगठनों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया.
झाझा स्थित नागी पक्षी अभयारण्य में वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि परिवहन मंत्री दामोदर रावत ने अधिक से अधिक वृक्ष लगाने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए जनभागीदारी बेहद जरूरी है.
जमुई के चिल्ड्रेन पार्क में जिला एवं सत्र न्यायाधीश, जिला पदाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और वन प्रमंडल पदाधिकारी समेत कई अधिकारियों ने सामूहिक वृक्षारोपण कर हरित भविष्य का संदेश दिया. वहीं जिला न्यायालय परिसर में भी न्यायिक पदाधिकारियों ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई.
विद्यालयों में भी विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए. डाबिल, गोला, खुरांडा-लिलावरण और सिकंदरा के विभिन्न विद्यालयों में वृक्षारोपण के साथ चित्रकला, भाषण, सांस्कृतिक कार्यक्रम और अन्य प्रतियोगिताओं का आयोजन हुआ. उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित कर उन्हें प्रकृति संरक्षण के लिए प्रेरित किया गया.
डाबिल में रीजेनेरेटिव बिहार के सहयोग से आयोजित परिचर्चा में कृषि वानिकी और जैविक खेती को बढ़ावा देने पर विशेष चर्चा हुई. किसानों ने टिकाऊ कृषि पद्धतियों तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से जुड़े अपने अनुभव साझा किए.
श्रीकृष्ण मेमोरियल स्टेडियम में सामूहिक वृक्षारोपण के बाद विद्यार्थियों की पर्यावरण जागरूकता रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया. रैली के माध्यम से लोगों को स्वच्छ पर्यावरण, जैव विविधता संरक्षण, जल संरक्षण और प्लास्टिक प्रदूषण से मुक्ति का संदेश दिया गया.
इसके अलावा जिले के सभी प्रखंडों में पर्यावरण रथ का संचालन किया गया. रथ के माध्यम से पंचायतों, विद्यालयों और सार्वजनिक स्थलों पर पहुंचकर लोगों को वृक्षारोपण, जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता संवर्धन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया.
वन विभाग के इस व्यापक अभियान ने यह संदेश दिया कि प्रकृति की रक्षा केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सहभागिता से ही संभव है. हरियाली बढ़ाने और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से आयोजित कार्यक्रमों ने जिले में पर्यावरण चेतना को नई मजबूती प्रदान की.
