दानापुर रेल मंडल अंतर्गत किऊल-झाझा रेलखंड के मध्य पड़ने वाले जमुई जिले के गिद्धौर रेलवे स्टेशन की स्थिति इन दिनों बद से बदतर हो गई है. रेल प्रबंधन को रोजाना लाखों रुपये का राजस्व देने वाले इस स्टेशन पर बुनियादी यात्री सुविधाओं का घोर अभाव है. वर्तमान में स्टेशन की बदहाली यात्रियों के लिए भारी परेशानी का सबब बन गई है. डाउन प्लेटफॉर्म पर स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां रेल सफर के लिए आने वाले यात्रियों को शुद्ध पेयजल और साफ शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए भी भटकना पड़ रहा है.
न पीने को शुद्ध पानी, न शौचालय में दरवाजा
गिद्धौर रेलवे स्टेशन के अप और डाउन, दोनों ही प्लेटफॉर्म पर शुद्ध पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं है. गर्मी के मौसम में यात्रियों को अपनी प्यास बुझाने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है. वहीं, स्टेशन पर बने शौचालय की स्थिति अत्यंत ही जर्जर और अमानवीय है. न सिर्फ उसकी दीवारें टूटी हुई हैं, बल्कि दरवाजा भी उखड़ा हुआ है, जिससे खासकर महिला यात्रियों को भारी फजीहत होती है. शौचालय के अंदर पानी की भी कोई सुविधा नहीं है. साफ-सफाई का आलम यह है कि शौचालय हो या यात्री प्रतीक्षालय, सभी की दीवारों और छतों में सीलन जमी हुई है. पूरे स्टेशन परिसर में कूड़ेदान तक की कोई व्यवस्था नहीं है.
दर्जनों गांवों की लाइफलाइन है गिद्धौर स्टेशन
गिद्धौर रेलवे स्टेशन इस इलाके के दर्जनों गांवों के लिए एक 'लाइफलाइन' का काम करता है. यह स्टेशन धोबघट, मौरा, बंधौरा, गंगरा, कोल्हुआ, खड़हुआ, सेवा, संसारपुर, केतरु नवादा, रतनपुर, पूर्वी गुगुलडीह, कुंधुर, पतसंडा, बरदघट्टा, सिमेरिया और कुमरडीह सहित कई गांवों के हजारों रेल यात्रियों को सीधे बिहार, झारखंड और बंगाल से जोड़ता है. इसके बावजूद, रेल प्रबंधन की उदासीनता और रेल अधिकारियों की उपेक्षा के कारण यह महत्वपूर्ण स्टेशन बदहाली का शिकार है.
ग्रामीणों ने रेल प्रबंधन से की अविलंब सुधार की मांग
गिद्धौर स्टेशन पर व्याप्त इन यात्री समस्याओं को लेकर ग्रामीण रेल यात्री पंकज चौधरी, शिक्षिका सुधा सिंह, बबिता कुमारी, सुनील सिंह, प्रमोद कुमार, प्रकाश मिश्रा, उत्पल कुमार और प्रशांत कुमार आदि ने अपना कड़ा रोष व्यक्त किया है. यात्रियों का कहना है कि उन्होंने इन समस्याओं की ओर कई बार रेल प्रबंधन का ध्यान लिखित रूप से आकृष्ट कराया है, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है. स्थानीय ग्रामीणों और यात्रियों ने रेलवे प्रशासन से मांग की है कि स्टेशन की मूलभूत संरचना में सुधार लाया जाए. उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि अविलंब शुद्ध पेयजल, सुरक्षित शौचालय और सुविधाजनक माहौल बहाल नहीं किया गया, तो यात्रियों का आक्रोश बढ़ेगा और इससे अंततः रेलवे को ही राजस्व का नुकसान उठाना पड़ेगा.
