जमुई से राहुल सिंह की रिपोर्ट. जिले के खैरा प्रखंड अंतर्गत अमारी गांव (वार्ड नंबर 9) में मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना की पोल खुलती नजर आ रही है. यहाँ नल-जल योजना का लाभ ग्रामीणों को आज तक नहीं मिल पाया है. वर्ष 2020 में पानी टंकी और पाइपलाइन का काम शुरू तो हुआ, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी लोगों के घरों तक एक बूंद पानी नहीं पहुँच सका है, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है.
योजना सिर्फ कागजों तक सीमित, पाइप भी हुए क्षतिग्रस्त
ग्रामीणों का गंभीर आरोप है कि यह महत्वपूर्ण योजना सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गई है. गांव के कुछ हिस्सों में जो पाइपलाइन बिछाई गई थी, वह देखरेख के अभाव में जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो चुकी है. वहीं, आंधी-तूफान के कारण टंकी और मोटर के भी खराब होने की आशंका है. विभाग की इस उदासीनता के कारण सरकारी राशि का दुरुपयोग हो रहा है और जनता प्यासी है.
पेयजल के साथ जल निकासी की भी बड़ी समस्या
ग्रामीणों ने बताया कि गांव की सबसे बड़ी समस्या जल निकासी के लिए नाले का अभाव है. नाला नहीं होने के कारण बारिश का पानी सड़कों पर जमा हो जाता है और लोगों के घरों में घुस जाता है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि नल-जल योजना चालू हो भी गई, तो बिना नाले के गांव की स्थिति और भी नारकीय हो जाएगी.
गर्मी में बढ़ी मुश्किलें, ताने सुनने को मजबूर हैं गरीब
भीषण गर्मी में पेयजल संकट और गहरा गया है. निजी चापाकल वाले परिवार तो किसी तरह गुजारा कर रहे हैं, लेकिन गरीब परिवारों को पानी के लिए दूसरों के घरों पर निर्भर रहना पड़ता है, जहाँ उन्हें अक्सर ताने भी सुनने पड़ते हैं. ग्रामीण कांग्रेस तांती ने बताया कि 2020 में टंकी लगी थी, पर आज तक पानी की एक बूंद नसीब नहीं हुई. वहीं जनार्दन तांती और ललन कुमार तांती ने कहा कि वार्ड के एक हिस्से में पानी मिल रहा है, जबकि दूसरे इलाके के लोग बूंद-बूंद को तरस रहे हैं.
शीघ्र समाधान की मांग
ग्रामीणों ने सरकार और संबंधित विभाग से मांग की है कि बंद पड़ी योजना को जल्द चालू किया जाए, खराब मोटर और पाइपों की मरम्मत हो तथा गांव में नाला निर्माण कराया जाए. लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे.
