सीजेएम ने किशोर न्याय बोर्ड का किया औचक निरीक्षण, बाल बंदियों के बेहतर भविष्य पर फोकस
Jamui News : जमुई में किशोर न्याय व्यवस्था को और अधिक संवेदनशील एवं प्रभावी बनाने की दिशा में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने बड़ा कदम उठाया है. औचक निरीक्षण के दौरान उन्होंने बाल बंदियों की सुविधाओं, सुरक्षा और पुनर्वास व्यवस्थाओं का जायजा लिया तथा अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए.
जमुई से अर्जुन अरनव की रिपोर्ट
Jamui News : बाल अधिकारों की सुरक्षा और किशोर न्याय प्रणाली को मजबूत बनाने के उद्देश्य से मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) दिलीप कुमार राय ने मंगलवार को किशोर न्याय बोर्ड (जेेजेबी) का औचक निरीक्षण किया. इस दौरान उन्होंने वहां रह रहे बाल बंदियों की सुविधाओं, स्वच्छता, सुरक्षा और पुनर्वास कार्यक्रमों की गहन समीक्षा की. निरीक्षण के दौरान किशोरों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं और आवश्यकताओं की भी जानकारी ली गई.
रहन-सहन और सुविधाओं का लिया जायजा
निरीक्षण के दौरान सीजेएम ने बाल बंदियों के रहन-सहन, खान-पान, स्वच्छता और सुरक्षा व्यवस्था का बारीकी से अवलोकन किया. उन्होंने यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि प्रत्येक किशोर को सुरक्षित, सम्मानजनक और सुधारात्मक वातावरण उपलब्ध हो. साथ ही संस्थान में उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं की भी समीक्षा की गई.
किशोरों से सीधे की बातचीत
सीजेएम दिलीप कुमार राय ने वहां रह रहे किशोरों से बातचीत कर उनकी समस्याओं, जरूरतों और सुझावों को सुना. उन्होंने कहा कि कानून के दायरे में रहते हुए हर बाल बंदी को बेहतर अवसर और सकारात्मक माहौल मिलना चाहिए, ताकि वह भविष्य में समाज की मुख्यधारा से जुड़ सके.
शिक्षा और पुनर्वास कार्यक्रमों पर विशेष जोर
निरीक्षण के दौरान जेेजेबी की प्रधान मजिस्ट्रेट मनीषा कुमारी एवं अन्य अधिकारियों को आवश्यक निर्देश देते हुए सीजेएम ने कहा कि किशोरों के पुनर्वास, शिक्षा, परामर्श और व्यक्तित्व विकास से जुड़े कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी जाए. उन्होंने कहा कि सुधारात्मक गतिविधियां ही किशोरों के बेहतर भविष्य की मजबूत नींव बन सकती हैं.
लापरवाही पर सख्त चेतावनी
सीजेएम ने स्पष्ट किया कि बाल अधिकारों की सुरक्षा और आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उन्होंने अधिकारियों को संस्थान की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनाने के लिए लगातार प्रयास करने का निर्देश दिया.
नियमित निरीक्षण का बताया उद्देश्य
उन्होंने कहा कि ऐसे निरीक्षण केवल व्यवस्थाओं की जांच तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसका उद्देश्य यह भी सुनिश्चित करना है कि किशोरों को सुधार, शिक्षा और पुनर्वास के बेहतर अवसर मिलें. इससे उन्हें समाज की मुख्यधारा में सम्मानजनक वापसी का अवसर प्राप्त होगा.
किशोर न्याय व्यवस्था को मिलेगी मजबूती
प्रशासनिक स्तर पर किए गए इस निरीक्षण को किशोर न्याय व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है. इससे न केवल संस्थान में सुधारात्मक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि बाल बंदियों के सर्वांगीण विकास और उनके अधिकारों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सकेगी.