Bulldozer Action: जमुई में करीब पांच दर्जन से ज्यादा परिवार वर्षों से रेलवे परिसर में झुग्गी-झोपड़ी बनाकर रह रहे हैं. अब उन्हें यहां से हटने का नोटिस मिल गया है. प्रशासन ने साफ कहा है कि 6 अप्रैल तक जगह खाली करनी होगी, नहीं तो 7 अप्रैल से बुलडोजर चलाया जाएगा.
अचानक बड़ा सकंट हुआ खड़ा
इन परिवारों की हालत ऐसी है कि उनके पास जाने के लिए कोई दूसरी जगह नहीं है. कई लोग पिछले 40-50 साल से यहीं रह रहे हैं और उनकी कई पीढ़ियां भी इसी जगह पर पली-बढ़ी हैं. अब अचानक नोटिस मिलने से उनके सामने रहने का बड़ा संकट खड़ा हो गया है.
जमीन पर दूसरे लोगों का कब्जा
हैरानी की बात यह है कि इन परिवारों के 200 से ज्यादा लोगों के नाम वोटर लिस्ट में हैं और वे सरकारी योजनाओं का फायदा भी लेते रहे हैं. करीब 20 साल पहले सरकार ने 97 परिवारों को बसाने के लिए जमीन का पर्चा भी दिया था, लेकिन आज तक वहां बसाने की कोई ठोस व्यवस्था नहीं हुई. अब उस जमीन पर दूसरे लोगों का कब्जा हो गया है.
नहीं निकला कोई समाधान
नोटिस मिलने के बाद इन परिवारों ने कई अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से मदद की गुहार लगाई है, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं निकला है. रेलवे प्रशासन ने 40 झोपड़ियों को खाली कराने का आदेश दिया है, वहीं 142 पुराने रेलवे क्वार्टर को भी तोड़ा जा रहा है. इनमें कई परिवार रह रहे हैं.
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लोग बोले- नहीं हटेंगे
इन परिवारों का कहना है कि वे सालों से शहर और रेलवे की सफाई में योगदान दे रहे हैं. कई बार पुलिस और रेलवे को भी उनकी मदद लेनी पड़ती है. ऐसे में बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के उन्हें हटाना गलत है. पीड़ित परिवारों का कहना है कि जब तक उन्हें रहने के लिए स्थायी जगह नहीं मिलेगी, वे यहां से नहीं हटेंगे. अगर उनकी बात नहीं सुनी गई तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे.
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