बरनार ने पुनः जगायी उम्मीद, किसानों के चहरे खिले

क्षेत्र की बेहद महत्वाकांक्षी व बहुप्रतीक्षित परियोजना में शुमार बरनार जलाशय के निर्माण कार्य को पूरा करने की कैबिनेट से स्वीकृति मिलते ही एकबार फिर क्षेत्रवासियों को उम्मीद जग गयी है.

सोनो. क्षेत्र की बेहद महत्वाकांक्षी व बहुप्रतीक्षित परियोजना में शुमार बरनार जलाशय के निर्माण कार्य को पूरा करने की कैबिनेट से स्वीकृति मिलते ही एकबार फिर क्षेत्रवासियों को उम्मीद जग गयी है. किसानों के चेहरे तो खिले-खिले नजर आ रहे हैं. मालूम हो कि बिहार के कैबिनेट की बैठक में बरनार जलाशय निर्माण कार्य को पूरा करने की स्वीकृति मिल गयी है. इसके लिए लगभग 2580 करोड़ का बजट प्रस्तावित किया गया है. बीते वर्ष के अंतिम लगातार दो दिनों तक प्रभात खबर ने बरनार जलाशय योजना को लेकर विस्तृत खबर प्रकाशित करते हुए अगले वर्ष की उम्मीदों में इस परियोजना को रखा था. इससे पदाधिकारियों का ध्यान आकृष्ट हुआ था. दो माह बाद ही कैबिनेट में स्वीकृति मिलने की खबर मिलते ही क्षेत्रवासियों के चेहरे खिल गये. बीते चार दशकों से जो उम्मीदें दम तोड़ रही थीं, वह एकबार फिर जग गयी. पांच दशक पूर्व जिस परियोजना के निर्माण की जरूरत महसूस की गयी थी और जिसके निर्माण कार्य शुरू होने के बाद से ही परियोजना बाधाओं के जंजाल में फंस गयी थी. आखिरकार अब उसका निर्माण संभव हो सकेगा.

वन व पर्यावरण विभाग की आपत्ति थी बड़ी बाधा, लेना होगा एनओसी

बरनार जलाशय के बंद निर्माण कार्य को पुनः शुरू करने में सबसे बड़ी बाधा वन व पर्यावरण विभाग से अनापत्ति प्रमाण लेना था. इसी विभाग की आपत्ति से अड़चनें आयी थीं. दरअसल, जलाशय के निर्माण के बाद लगभग जलमग्न क्षेत्र व अन्य निर्माण में 460 हेक्टेयर जमीन जायेगी. इसी डूब क्षेत्र में जंगल के पेड़ भी हैं. लिहाजा वन विभाग ने इतनी जमीन और पेड़ को अन्यत्र उपलब्ध कराने के बाद ही एनओसी देने की बात कही. अब इसे उस समय की सरकार व प्रशासन की शिथिलता कहें या फिर जनप्रतिनिधियों की उदासीनता, इतने वर्षों में वन विभाग को दिये जाने वाली जमीन की उपलब्धता नहीं हो सकी. लगभग एक दशक पूर्व तत्कालीन डीएम शशिकांत तिवारी द्वारा जमीन उपलब्धता को लेकर सक्रियता दिखायी गयी थी. बाद में मामला पहले की तरह पुनः ठंडे बक्से में चला गया और इस कार्य के लिए जमीन संबंधित कार्य शिथिल हो गया.

सोनो झाझा सहित पांच प्रखंडों से उपलब्ध हुई जमीन

उक्त डैम निर्माण की सबसे बड़ी बाधा वन विभाग को जमीन मुहैया कराने को लेकर वर्तमान डीएम अभिलाषा शर्मा ने ने गंभीरता दिखायी. मंत्री सुमित सिंह का भी उन्हें सहयोग मिला. वे हाल के दिनों में जलाशय निर्माण स्थल का मुआयना भी किया. सोनो सीओ सुमित कुमार आशीष ने पूरी शिद्दत से इसके लिए काम किया और अंततः वन विभाग को जितनी जमीन चाहिए थी, उसकी व्यवस्था की गयी. अधिकांश जमीन वन विभाग को हस्तांतरित कर दी गयी है. फरवरी में महज 183 एकड़ जमीन शेष रह गयी थी, जिसे अंतिम फरवरी में हस्तांतरित हो जानी है. अधिकांश जमीन को सोनो और झाझा प्रखंड में उपलब्ध करायी गयी. इन दो प्रखंडों के अलावे चकाई, खैरा और गिद्धौर प्रखंड से भी जमीन उपलब्ध कराकर वन विभाग को दिया गया है. यहां यह बता दें कि समय के साथ वन विभाग द्वारा दी जाने वाली जमीन को लगभग दो गुना कर दिया गया. इस तरह वन विभाग को लगभग 19 सौ एकड़ जमीन चाहिए थी, इसमें से अधिकांश उपलब्ध करा दी गयी है. शेष 183 एकड़ जमीन हस्तांतरित होते ही वन व पर्यावरण विभाग से अनापत्ति प्रमाण मिल जायेगा. इसके उपरांत प्रस्तावित राशि से निर्माण कार्य की प्रक्रिया शुरू हो जायेगी. विदित हो कि उक्त डैम निर्माण के बाद डूब क्षेत्र में आने वाले पेड़ को लेकर वन विभाग ने जितने पेड़ लगाने की मांग की थी उसे मनरेगा व अन्य योजनाओं के द्वारा पहले ही लगाये जा चुके हैं.

बरनार जलाशय योजना: एक परिचय

जमुई जिला के चकाई विधान सभा क्षेत्र अंतर्गत सोनो प्रखंड मुख्यालय से 19 किलोमीटर दूर बटिया के कटहराटांड़ के निकट जंगल सीमा पर बड़े पहाड़ों के बीच बरनार नदी पर बरनार जलाशय बनना है. लगभग 283 मीटर लंबे कंक्रीट सह मेशोनरी डैम की ऊंचाई लगभग 75 मीटर होगी. इसका जल ग्रहण क्षेत्र 102 वर्ग मील है. इस योजना के बाएं मुख्य नहर का जलस्राव 13.536 घन मीटर प्रति सेकेंड (क्यूमेक) और दायी नहर का जलस्राव 6.371 घन मीटर प्रति सेकेंड (क्यूमेक) है. दरअसल वर्ष 1969 में पड़े अकाल के बाद इस डैम की जरूरत महसूस की गयी थी. इसके बाद इसके निर्माण को लेकर तैयारियां शुरू हुई. तत्कालीन मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र और क्षेत्र के दिग्गज नेता श्रीकृष्ण सिंह के प्रयास से 1974 में तत्कालीन क्षेत्रीय सांसद व केंद्रीय मंत्री डीपी यादव द्वारा आधारशीला रखी गयी थी. 1974 से 1976 के बीच सुस्त पड़े कार्य में गति देते हुए सरकार ने कार्य को आगे बढ़ाया और 1980 के दशक में कार्य में प्रगति आयी. परंतु कुछ ही वर्ष के कार्य होने के बाद इस जलाशय के निर्माण कार्य पर जो ग्रहण लगा, वह चार दशकों तक लगा ही रहा. अब पुनः इसके निर्माण को लेकर सरकार प्रयत्नशील हुई है.

56 हजार एकड़ भूमि पर लहलहा उठेगी फसलें

बताया जाता है कि इस जलाशय के निर्माण होने से क्षेत्र के लगभग 56 हजार एकड़ भूमि पर फसलें लहलहा उठेंगी. खेतों में हरियाली आने से इलाके के किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी. जिला के चार प्रखंड सीधे तौर पर इससे लाभान्वित होंगे. जानकार की मानें तो जलाशय से रूपांकित सिंचन क्षमता खरीफ के लिए 19433 हेक्टेयर व रबी फसल के लिए 3239 हेक्टेयर भूमि है. डैम के निर्माण से सोनो प्रखंड के अलावे खैरा, झाझा व गिद्धौर प्रखंड में भी सिंचाई क्षमता का सृजन होगा.

श्रेय लेने की लगी होड

बरनार जलाशय निर्माण को कैबिनेट से स्वीकृति मिलते ही अब नेताओं में श्रेय लेने की होड़ लग गयी है. सूबे के विज्ञान प्रावैधिकी सह तकनीकी शिक्षा मंत्री सुमित कुमार सिंह ने इसे निरंतर प्रयास का नतीजा बताया, साथ ही कहा कि इस व्यक्तिगत प्रण के पूर्ण होने पर वे आनंदित महसूस कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि उनके दादा श्रीकृष्ण सिंह के प्रयास से ही 70 के दशक में इस परियोजना को लाया गया था, जबकि पिता नरेंद्र सिंह द्वारा वर्षों तक इसकी बाधा को दूर करने के लिए प्रयास किया गया था. अब नई कृषि क्रांति का आगाज होगा. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को क्षेत्र की जनता की ओर से आभार भी व्यक्त किया गया. वहीं क्षेत्र के सांसद अरुण भारती ने इसे लोजपा (आर) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान के अथक प्रयास व उनके द्वारा मुख्यमंत्री से की गयी मांग का परिणाम बताये. उन्होंने कहा कि मैं सांसद बनने के बाद मुख्यमंत्री से इस परियोजना को लेकर चर्चा की थी. साथ ही प्रगति यात्रा के दौरान भी मुख्यमंत्री का ध्यान आकृष्ट कराया था. इसके बाद उन्होंने सकारात्मक घोषणा की थी. मैंने चुनाव में किये गये वादे पूरा करने के लिए ही लगातार प्रयास किये थे. इससे सिंचाई व पेयजल की समस्या हल होगी और रोजगार सृजन होगा. इधर, हाल के दिनों में सामाजिक कार्य में बढ़चढ़ कर भाग लेने वाले और क्षेत्र में रोजगार को लेकर प्रयत्नशील रहने वाले सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता सह समाजसेवी रमेश कुमार सिंह ने भी इसका स्वागत किया. उनके सहयोगी ने कहा कि उन्होंने इस बरनार जलाशय निर्माण के पुनः शुरू करवाने में आने वाले तकनीकी कठिनाइयों को दूर करने के लिए लगातार प्रयत्नशील रहे और संबंधित विभागों से लगातार संपर्क करते रहे. बहरहाल, बीते चार दशकों से हमेशा चुनावी मुद्दा रहने वाले प्रस्तावित जलाशय परियोजना निर्माण को लेकर जो केबिनेट से स्वीकृति मिली है, उसका सभी ने स्वागत किया है.

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By Prabhat Khabar News Desk

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