सोनो (जमुई). बरनार नदी पर सोनो-चुरहेत के बीच बने काजवे पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद बड़े और भारी वाहनों की आवाजाही पहले ही रोक दी गयी थी. इसके बाद पश्चिमी क्षेत्र की ओर जाने वाले भारी वाहन बंदरमारा-चुरहेत सड़क को वैकल्पिक मार्ग के रूप में इस्तेमाल कर रहे थे. अब इस मार्ग पर भी ओवर हाइट बैरियर लगाकर बड़े और भारी वाहनों के आवागमन पर रोक लगा दी गयी है. इससे चुरहेत समेत पश्चिमी क्षेत्र के कई गांवों में जरूरी सामान की आपूर्ति और कारोबार प्रभावित होने लगा है.
ग्रामीण सड़क पर लगातार बढ़ गया था भारी वाहनों का दबाव
बटिया-करममाटांड़-बंदरमारा होते हुए चुरहेत जाने वाले मार्ग का इस्तेमाल काजवे पुल पर रोक के बाद बड़े वाहनों के लिए किया जा रहा था. स्थानीय लोगों के अनुसार यह ग्रामीण सड़क है और इसकी भार सहने की क्षमता एनएच या एसएच जैसी नहीं है. जब इस सड़क से लगातार भारी वाहनों का आवागमन बढ़ने लगा तो सड़क को क्षतिग्रस्त होने से बचाने के लिए विभाग की ओर से ओवर हाइट बैरियर लगा दिया गया. इसके बाद बड़े वाहनों का आवागमन रुक गया है.
सीमेंट, छड़ और किराना सामान की आपूर्ति पर असर
बैरियर लगने के बाद चुरहेत, चरकापत्थर, करमटिया, अगहरा समेत आसपास के गांवों में रोजमर्रा की आपूर्ति प्रभावित होने लगी है. इन क्षेत्रों में सीमेंट, छड़, किराना और अन्य जरूरी सामान की ढुलाई बड़े वाहनों से होती है.
बड़े वाहनों के प्रवेश पर रोक के कारण दुकानदारों और कारोबारियों को सामान मंगाने में परेशानी हो रही है. स्थानीय लोगों का कहना है कि समस्या लंबे समय तक बनी रही तो इसका असर बाजार और निर्माण कार्यों पर भी पड़ सकता है.
वैकल्पिक मार्ग होने के बावजूद आवागमन नहीं हो रहा सुगम
ट्रक चालकों का कहना है कि वैकल्पिक सड़क मौजूद है, लेकिन बड़े वाहनों के लिए यह मार्ग पूरी तरह सुगम नहीं है. सड़क की क्षमता सीमित होने के कारण भारी वाहनों का लगातार परिचालन सड़क के लिए भी जोखिम पैदा कर सकता है.स्थानीय लोगों के सामने स्थिति यह है कि एक ओर मुख्य मार्ग पर क्षतिग्रस्त काजवे पुल के कारण भारी वाहनों की आवाजाही बंद है, वहीं दूसरी ओर वैकल्पिक मार्ग पर भी बैरियर लगा दिया गया है.
बंदरमारा-चुरहेत सड़क को विकसित करने की मांग
स्थानीय लोगों ने समस्या के स्थायी समाधान के लिए बंदरमारा से चुरहेत तक करीब आठ किलोमीटर सड़क को पथ निर्माण विभाग के अधीन लेकर विकसित करने की मांग की है. लोगों का कहना है कि बटिया-करमटांड़ तक पहले से मौजूद आरसीडी सड़क को बंदरमारा-चुरहेत मार्ग से जोड़ दिया जाए तो एक मजबूत वैकल्पिक बाईपास तैयार किया जा सकता है.
ग्रामीणों के अनुसार सड़क को चौड़ा और मजबूत करने के बाद इसका इस्तेमाल बड़े वाहनों के लिए भी किया जा सकेगा. इससे वर्तमान में उत्पन्न समस्या का समाधान होने के साथ क्षेत्र की कनेक्टिविटी भी बेहतर होगी.
चुरहेत पुल बनने के बाद भी उपयोगी रहेगा वैकल्पिक मार्ग
ग्रामीणों का कहना है कि चुरहेत पुल के पुनर्निर्माण के बाद भी बंदरमारा-चुरहेत सड़क की उपयोगिता बनी रहेगी. भविष्य में मुख्य मार्ग पर पुल, सड़क या किसी अन्य कारण से आवागमन बाधित होने की स्थिति में यह रास्ता लोगों और मालवाहक वाहनों के लिए बैकअप कनेक्टिविटी का काम कर सकता है. ऐसे में लोगों का कहना है कि मौजूदा समस्या को केवल बैरियर हटाने तक सीमित रखने के बजाय वैकल्पिक मार्ग को स्थायी रूप से विकसित करने की दिशा में पहल की जानी चाहिए.
स्थल निरीक्षण और सड़क के मजबूतीकरण की मांग
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से ओवर हाइट बैरियर हटाने के साथ सड़क का स्थल निरीक्षण कराने की मांग की है. इसके अलावा सड़क को आरसीडी के अधीन लेकर चौड़ीकरण और मजबूतीकरण की प्रक्रिया शुरू करने की मांग भी की गयी है. ग्रामीणों का कहना है कि इससे पश्चिमी क्षेत्र के गांवों को बेहतर सड़क संपर्क मिलेगा और भविष्य में मुख्य मार्ग बाधित होने पर लोगों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा.
