बाल गंगाधर तिलक
बाल गंगाधर तिलक: कलम से जगाई आजादी की अलख
बाल गंगाधर तिलक ने ‘केसरी’ और ‘मराठा’ अखबारों के जरिए अंग्रेजी शासन के खिलाफ जनमत तैयार किया. उन्होंने अपनी पत्रकारिता से लोगों में राष्ट्रप्रेम और स्वराज की भावना जगाई. तिलक का प्रसिद्ध नारा ‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है’ आजादी की लड़ाई का मजबूत संदेश बना. उनकी लेखनी ने स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा और ऊर्जा दी.
गणेश शंकर विद्यार्थी
गणेश शंकर विद्यार्थी: कलम से उठाई जनता की आवाज
गणेश शंकर विद्यार्थी ने ‘प्रताप’ अखबार के जरिए अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ मजबूत आवाज उठाई. उन्होंने अपनी पत्रकारिता से क्रांतिकारियों, किसानों और आम जनता के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया. देश में सांप्रदायिक हिंसा भड़कने पर वे लोगों को बचाने के लिए खुद मैदान में उतरे. इसी दौरान 1931 में कानपुर में उनकी शहादत हुई, जिससे पत्रकारिता और स्वतंत्रता संग्राम का यह अध्याय अमर हो गया.
मौलाना अबुल कलाम आजाद
मौलाना आजाद की कलम ने जगाई आजादी की आवाज
मौलाना अबुल कलाम आजाद ने ‘अल-हिलाल’ और ‘अल-बिलाग’ के जरिए अंग्रेजी शासन के खिलाफ जनमत तैयार किया. उन्होंने अपनी पत्रकारिता से हिंदू-मुस्लिम एकता और स्वतंत्रता का संदेश देशभर में पहुंचाया. आजादी के आंदोलन में उनकी लेखनी और विचारों ने लोगों को राष्ट्रीय आंदोलन से जुड़ने के लिए प्रेरित किया. स्वतंत्रता के बाद वे भारत के पहले शिक्षा मंत्री बने और शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया.
अम्बिका प्रसाद वाजपेयी
अम्बिका प्रसाद वाजपेयी: जेल की सलाखों से जगाई क्रांति
अम्बिका प्रसाद वाजपेयी ने ‘कर्मयोगी’ और ‘स्वतंत्र’ जैसे पत्रों के जरिए अंग्रेजी शासन की नीतियों का खुलकर विरोध किया. उनकी लेखनी ने लोगों में राष्ट्रप्रेम और स्वतंत्रता की भावना को मजबूत किया. ब्रिटिश हुकूमत ने उनकी आवाज दबाने की कोशिश की, लेकिन वे अपने विचारों से पीछे नहीं हटे. स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उन्हें कई बार जेल की सजा भी झेलनी पड़ी.
महात्मा गांधी
महात्मा गांधी: कलम से गूंजा सत्य और अहिंसा का संदेश
महात्मा गांधी ने ‘यंग इंडिया’, ‘नवजीवन’ और ‘हरिजन’ के जरिए अपने विचारों को जन-जन तक पहुंचाया. उन्होंने पत्रकारिता को स्वतंत्रता आंदोलन का माध्यम बनाया और सत्य, अहिंसा व स्वराज का संदेश फैलाया. ‘यंग इंडिया’ में ब्रिटिश शासन की नीतियों की तीखी आलोचना के चलते उन्हें 1922 में राजद्रोह के मामले में मुकदमे और जेल का सामना करना पड़ा. गांधी की लेखनी ने स्वतंत्रता आंदोलन के साथ सामाजिक सुधार और जनजागरण को भी नई दिशा दी.
