पटना से अनिकेत त्रिवेदी की रिपोर्ट
Human Trafficking: बिहार के ग्रामीण इलाकों से गरीब और दलित परिवारों की मासूम बेटियां एक संगठित और क्रूर ‘थ्री-टियर’ (त्रिस्तरीय) मानव तस्करी सिंडिकेट के निशाने पर हैं. प्रभात खबर की विशेष पड़ताल के अनुसार, यह नेटवर्क किशोरियों को गायब कर दिल्ली, कोलकाता, हैदराबाद और बेंगलुरु जैसे महानगरों में जबरन शादी या बंधुआ मजदूरी के लिए बेच रहा है.
मानव तस्करी का ‘सोर्स स्टेट’ बना बिहार
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़े बताते हैं कि बिहार अब मानव तस्करी का बड़ा ‘सोर्स स्टेट’ बन चुका है. राज्य में हर साल औसतन 12,000 से 14,000 बच्चे गायब हो रहे हैं. साल 2025 में यह आंकड़ा 14,699 तक पहुंच गया था. गायब होने वाले बच्चों में लगभग 60 प्रतिशत हिस्सेदारी 18 साल से कम उम्र की किशोरियों की है.
साल 2023 में तो लापता बच्चों में 75 प्रतिशत (हर 4 में से 3) सिर्फ लड़कियां थीं. लेकिन राहत की बात है कि पुलिस और सामाजिक संगठनों ने मिलकर पिछले दो सालों में 3,462 बेटियों (2024-25 में 1,970 और 2025-26 में 1,492) को सुरक्षित रेस्क्यू किया है.
ऐसे काम करता है यह खौफनाक नेटवर्क
तस्करों का यह सिंडिकेट तीन अलग-अलग लेवल पर काम करता है, जिससे पुलिस मुख्य सरगना तक नहीं पहुंच पाती
लेवल 1 (लोकल एजेंट): गांवों के स्थानीय युवा एजेंटों को लड़कियों को फंसाने के लिए एक से दो महीने का टारगेट मिलता है. ये दोस्ती, प्यार, शादी या नौकरी का लालच देकर लड़कियों का भरोसा जीतते हैं और उन्हें घर छोड़ने पर मजबूर करते हैं.
लेवल 2 (ट्रांजिट एजेंट): गांव से बाहर निकलते ही लड़कियों को दूसरे गिरोह को सौंप दिया जाता है, जो उन्हें नशा देकर या डराकर लंबी दूरी की ट्रेनों से दूसरे राज्यों में ले जाते हैं.
लेवल 3 (खरीद-बिक्री गिरोह): महानगरों में पहुंचने पर तीसरा गिरोह एक्टिव होता है. ये लड़कियों को बंधक बनाकर शारीरिक-मानसिक शोषण करते हैं और आखिर में उन्हें ऊंचे दामों पर जबरन शादी या घरेलू काम के लिए बेच देते हैं.
पिछले 6 महीनों में रेस्क्यू की गयीं पांच बेटियों की दास्तान
- मुजफ्फरपुर: साहेबगंज की 19 साल की रूपा (बदला हुआ नाम) 9 फरवरी 2026 को आधार कार्ड सुधरवाने निकली थी. सहेली के ननिहाल से उसे हैदराबाद पहुंचा दिया गया, जहां पार्किंग में नौकरी के बहाने उसे शादी के लिए बेचने की तैयारी थी. पुलिस ने समय रहते काजीगुड़ा से बचाया.
- रोहतास: कोचस की 15 साल की छात्रा प्रीति (बदला हुआ नाम) 1 जून 2026 को कोचिंग जाते समय लापता हो गई. दोस्त ने झांसा देकर उसे सासाराम स्टेशन पर अपने जीजा को सौंप दिया. नशा देकर उसे सिकंदराबाद ले जाया गया. बाद में स्टेशन से उसका रेस्क्यू हुआ.
- गोपालगंज: महम्मदपुर की 22 साल की रीतु (बदला हुआ नाम) 18 जनवरी 2026 को दवा लेने निकली थी. इसके बाद नहीं लौटी. आरोपी उसे शादी और नौकरी का झांसा देकर कोलकाता ले गया, जहां बेचने की तैयारी थी. घटना के 15 दिन बाद उसे बरामद किया गया.
- सीवान: जामो बाजार की 21 साल की रश्मि (बदला हुआ नाम) 18 जनवरी 2026 को फॉर्म भरने निकली और गायब हो गई. मानव तस्करी नेटवर्क के जरिये उसे भी हैदराबाद पहुंचाया गया, जहां से पुलिस ने उसे मुक्त कराया.
- मोतिहारी: पिपरा की 18 साल की संजना (बदला हुआ नाम) सहेली से मिले मोबाइल नंबर के झांसे में आकर सिकंदराबाद भाग गई. वहां उससे 12 घंटे बंधुआ मजदूरी कराई गई. जबरन शादी की तैयारी थी लेकिन पुलिस ने उसे बचा लिया.
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