भारत-नेपाल की सीमा पर छिपा है यह हनीमून डेस्टिनेशन, हसीन वादियों में बिता सकेंगे रोमांटिक पल

Honeymoon Destination: अगर आप शहरी भागदौड़ से दूर प्रकृति की गोद में सुकून और रोमांस की तलाश कर रहे हैं तो पश्चिम चंपारण का भिखना ठोरी आपके लिए परफेक्ट डेस्टिनेशन है. सर्दियों के मौसम में यहां कपल अपने रोमांटिक पल को यादगार बनाने के लिए पहुंचते हैं.

Honeymoon Destination: अगर आप शहरी भागदौड़ से दूर प्रकृति की गोद में सुकून और रोमांस की तलाश कर रहे हैं तो पश्चिम चंपारण का भिखना ठोरी आपके लिए परफेक्ट डेस्टिनेशन है. यहां न केवल बिहार बल्कि नेपाल के भी पर्यटक पहुंचते हैं. यह स्थान भारत और नेपाल की सीमा पर स्थित है. इसका एक भाग बिहार के चंपारण जिले में तो दूसरा नेपाल के परसा जिले में मौजूद है. यहां भारत और नेपाल की सीमाएं धुंधली होकर केवल प्राकृतिक सुंदरता की कहानी कहती हैं, किसी भी हनीमून कपल या एडवेंचर प्रेमी के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है.

भिखना ठोरी क्यों है खास?

भिखना ठोरी, जिसका नाम शायद आपने पहले कम सुना हो यह ऐसी जगह है, जहां प्रकृति ने अपनी खूबसूरती खुले दिल से लुटाई है. यहां का शांत वातावरण, हिमालय की चोटियों का विहंगम दृश्य, जंगलों के बीच बसे रिजॉर्ट्स और ऐतिहासिक महत्व इसे एक संपूर्ण डेस्टिनेशन बनाते हैं. जिला मुख्यालय बेतिया से यह 80 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. यह स्थान अपनी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है. यहां ठोरी रिजॉर्ट, लक्ष्मण झूला, सफेद और लाल पहाड़ी, सीता गुफा और झील के किनारे टेंट हाउस जैसे आकर्षण आपकी यात्रा को यादगार बना देंगे.

मिनटों में पहुंच जाएंगे बिहार से नेपाल

भिखना ठोरी का सबसे अनूठा पहलू यह है कि आप बिहार से नेपाल का सफर मिनटों में पैदल तय कर सकते हैं. सीमा पार करने के लिए मामूली चेकिंग के बाद आप बिना किसी शुल्क के नेपाल के ठोरी में प्रवेश कर सकते हैं. यहां का शांत वातावरण, पहाड़ी दृश्यों और जंगलों के बीच बसे रिजॉर्ट्स का अनुभव आपकी छुट्टियों को जादुई बना देगा.

सर्दी के दिनों में दिखता है अद्भुत नजारा

सर्दी के दिनों में यहां से हिमालय की हिमाच्छादित चोटियां और अन्नपूर्णा श्रेणी का नज़ारा देखने को मिलता है. ब्रिटिश शासनकाल में इंग्लैंड के राजा जॉर्ज पंचम ने भी यहां के प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लिया था. ब्रिटिश कालीन बंगले और अन्य ठहरने की जगहें आज भी इस क्षेत्र की ऐतिहासिक धरोहर को जीवंत करती हैं.

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हनीमून डेस्टिनेशन से वाल्मीकि टाइगर रिजर्व भी नजदीक

इस हनीमून डेस्टिनेशन से आप वाल्मीकि टाइगर रिजर्व भी जाकर आसानी से घूम सकते हैं. साथ ही नेपाल के प्रसिद्ध चितवन नेशनल पार्क भी यहां से काफी नजदीक है. एडवेंचर प्रेमियों के लिए यह जगह जन्नत से कम नहीं है. यहां का लक्ष्मण झूला, सीता गुफा, और जंगल सफारी आपको प्रकृति के करीब ले जाते हैं.

बिहार और नेपाल के बीच है यह जगह

भिखना ठोरी कैसे पहुंचें?

भिखना ठोरी पहुंचने के लिए नरकटियागंज से 45 किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ती है. यहां से भिखना ठोरी के पहले भाग तक सड़क मार्ग से पहुंचा जा सकता है. ठोठे खोला पुल पार करते ही आप नेपाल की सीमा में प्रवेश कर जाएंगे.

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लेखक के बारे में

अभिनंदन पांडेय पिछले दो वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की और दैनिक जागरण, भोपाल में काम किया. वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के हिस्सा हैं. राजनीति, खेल और किस्से-कहानियों में उनकी खास रुचि है. आसान भाषा में खबरों को लोगों तक पहुंचाना और ट्रेंडिंग मुद्दों को समझना उन्हें पसंद है. अभिनंदन ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से की. पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को सही तरीके से लोगों तक पहुंचाने की सोच ने उन्हें इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. दैनिक जागरण में रिपोर्टिंग के दौरान उन्होंने भोपाल में बॉलीवुड के कई बड़े कलाकारों और चर्चित हस्तियों के इंटरव्यू किए. यह अनुभव उनके करियर के लिए काफी अहम रहा. इसके बाद उन्होंने प्रभात खबर डिजिटल में इंटर्नशिप की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की वास्तविक दुनिया को करीब से समझा. बहुत कम समय में उन्होंने रियल टाइम न्यूज लिखना शुरू कर दिया. इस दौरान उन्होंने सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता भी बेहद जरूरी होती है. फिलहाल वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ काम कर रहे हैं. बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में कवर किया, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और वीडियो कंटेंट भी तैयार किए. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और भरोसेमंद खबर पहुंचे. पत्रकारिता में उनका लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और एक विश्वसनीय पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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