हाजीपुर में संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास महाराज के 650वें जन्म वर्ष के उपलक्ष्य में बिहार सरकार के निर्देश के तहत जिले में समरसता संकल्प अभियान चलाया जा रहा है. इसके तहत गुरुवार को जिले के विभिन्न महादलित टोलों में संत रविदास विकास शिविरों का आयोजन किया गया.
संत रविदास विकास शिविरों का आयोजन आगामी 15 फरवरी 2027 तक प्रत्येक बृहस्पतिवार को जिले के सभी प्रखंडों के विभिन्न महादलित टोलों में किया जाना है. इस अवधि में कुल 791 शिविर आयोजित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.
15 प्रखंडों की 50 पंचायतों में लगे शिविर
गुरुवार को जिले के 15 प्रखंडों की 50 पंचायतों में संत रविदास विकास शिविर आयोजित किए गए. राघोपुर प्रखंड की दो पंचायतों में शिविर प्रस्तावित था, लेकिन बाढ़ग्रस्त क्षेत्र होने के कारण वहां शिविर का आयोजन नहीं किया जा सका.
इन शिविरों के माध्यम से अनुसूचित जाति के पात्र परिवारों को सरकार की विभिन्न कल्याणकारी और विकासात्मक योजनाओं से जोड़ने की दिशा में कार्रवाई की जा रही है. शिविर में अधिकारियों और कर्मियों ने पात्र लाभार्थियों की समस्याएं सुनीं और योजनाओं से संबंधित आवेदन प्राप्त किए.
1,396 आवेदन मिले, 836 का निष्पादन
शिविरों के माध्यम से विभिन्न सरकारी योजनाओं से संबंधित पूर्व के 419 और शिविर के दौरान प्राप्त 977 आवेदनों को मिलाकर कुल 1,396 आवेदन प्राप्त हुए. इनमें से 836 आवेदनों का निष्पादन किया गया. यह प्राप्त कुल आवेदनों का 59.89 प्रतिशत है.
शेष आवेदनों को संबंधित विभागों को अग्रेतर कार्रवाई और निष्पादन के लिए भेजा गया है. शिविरों में विभिन्न विभागों के पदाधिकारियों और कर्मियों ने प्राप्त समस्याओं एवं आवेदनों पर आवश्यक कार्रवाई की. कई मामलों में यथासंभव ऑन द स्पॉट समाधान भी किया गया.
पात्र लाभार्थियों को योजनाओं से जोड़ने का निर्देश
शिविरों के दौरान पात्र लाभार्थियों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ और उनकी हकदारी उपलब्ध कराने की दिशा में कार्रवाई की गयी. इसके साथ ही लाभार्थियों के बीच जन्म प्रमाण पत्र का भी वितरण किया गया.
जिला पदाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि शिविरों के माध्यम से योजनाओं के लाभ से वंचित पात्र परिवारों की पहचान की जाए और उन्हें संबंधित योजनाओं से जोड़ा जाए.
उन्होंने प्राप्त आवेदनों पर विभागीय स्तर से समयबद्ध कार्रवाई करने का निर्देश दिया है. साथ ही लाभार्थियों को अनावश्यक कार्यालयी प्रक्रिया से मुक्त रखते हुए उन्हें योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है.
