श्रम कोड के खिलाफ प्रतिरोध मार्च

केंद्रीय श्रम संगठनों एवं संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम के तहत केंद्र सरकार के कथित मजदूर-किसान विरोधी कानून के खिलाफ यहां प्रतिवाद मार्च निकाला गया. सोमवार को शहर के राजेंद्र चौक से मार्च निकाल कर विभिन्न मार्गों से होते हुए गांधी चौक पहुंच कर प्रतिरोध सभा की गयी.

हाजीपुर. केंद्रीय श्रम संगठनों एवं संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम के तहत केंद्र सरकार के कथित मजदूर-किसान विरोधी कानून के खिलाफ यहां प्रतिवाद मार्च निकाला गया. सोमवार को शहर के राजेंद्र चौक से मार्च निकाल कर विभिन्न मार्गों से होते हुए गांधी चौक पहुंच कर प्रतिरोध सभा की गयी. मौके पर चार श्रम कोड से संबंधित कानून तथा किसान विरोधी कानून की प्रतियां जलाकर विरोध प्रकट किया गया. कार्यक्रम का संचालन ऐटक के नेता अमृत गिरि, सीटू के दीनबंधु प्रसाद तथा ऐक्टू के उमेश चंद्र पटेल ने किया. प्रतिरोध सभा में किसान नेता त्रिभुवन राय, अखिल भारतीय किसान महासभा के जिला सचिव गोपाल पासवान, ऐक्टू नेत्री संगीता देवी, खेतिहर मजदूर यूनियन के नेता शमशाद अहमद, मजदूर नेता केदार गुप्ता, नन्हे आलम, बच्चाबाबू आदि ने विचार रखे. वक्ताओं ने कहा कि मोदी सरकार ने 44 श्रमिक कानूनों को समाप्त कर उसके बदले चार श्रम कोड लाकर और काम के घंटे को बढ़ाकर मजदूरों के साथ अन्याय किया है. सरकार ने मजदूरों को गुलाम बनाने की सारी योजनाएं बना ली है और मालिकों को शोषण का पूरा अधिकार दे दिया है. दूसरी और तीन काले कृषि कानून लाकर सरकार ने किसान विरोधी होने का सबूत दे दिया है. इस काले कानून के खिलाफ 13 महीनों तक आंदोलन और उस दौरान 750 किसानों की शहादत के बाद केंद्र सरकार ने तीनों नये कृषि कानून को वापस लेने का लिखित समझौता किया था. साथ ही एमएससी की गारंटी का कानून बनाने का आश्वासन दिया था. लेकिन, चार साल बीतने के बाद भी सरकार ने आज तक एमएसपी गारंटी का कानून नहीं बनाया. इन सवालों को लेकर केंद्रीय श्रम संगठनों और संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से 26 नवंबर को पूरे देश में जिला स्तरीय प्रदर्शन कर जिलाधिकारी को मांगों का ज्ञापन सौंपा जायेगा.

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Author: DEEPAK MISHRA

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