Hajipur News : प्रवासी वोटरों ने चुनावी माहौल का बढ़ाया तापमान

वैशाली विधानसभा क्षेत्र में इस बार का चुनाव बेहद रोमांचक होता दिख रहा है. छठ पर्व के अवसर पर बड़ी संख्या में प्रवासी मतदाताओं के घर लौटने से राजनीतिक समीकरणों में हलचल मची है.

टेढ़ी बेलसर. वैशाली विधानसभा क्षेत्र में इस बार का चुनाव बेहद रोमांचक होता दिख रहा है. छठ पर्व के अवसर पर बड़ी संख्या में प्रवासी मतदाताओं के घर लौटने से राजनीतिक समीकरणों में हलचल मची है. माना जा रहा है कि ये मतदाता इस बार निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं. गांवों में लौटे प्रवासी मतदाताओं के कारण मतदान प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद जतायी जा रही है. महागठबंधन के लिए स्थिति इस बार पेचीदा है. राजद के अजय कुशवाहा और कांग्रेस के इं संजीव सिंह दोनों उम्मीदवार मैदान में हैं. इससे पारंपरिक वोटरों में असमंजस की स्थिति बनी है. राजनीतिक जानकार मानते हैं कि महागठबंधन के कोर वोटर किसी एक प्रत्याशी के पक्ष में गोलबंद हो सकते हैं, तो मुकाबले की दिशा बदल सकती है. राजद उम्मीदवार अजय कुशवाहा को इस बार जदयू के पारंपरिक कुशवाहा मतदाताओं का समर्थन मिलने की संभावना है. इसके साथ ही सहनी समाज के झुकाव से महागठबंधन को मजबूती मिल सकती है. पिछली बार एनडीए को मुकेश सहनी के कारण सहनी समाज के वोटों का लाभ मिला था, लेकिन इस बार सहनी महागठबंधन के साथ खड़ा है. यादव, मुस्लिम, कुशवाहा और सहनी समुदाय की एकजुटता से राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं. दूसरी ओर, एनडीए से जदयू उम्मीदवार और मौजूदा विधायक सिद्धार्थ पटेल पुनः मैदान में हैं. वे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जनकल्याणकारी योजनाओं जैसे 125 यूनिट मुफ्त बिजली, महिलाओं को आर्थिक सहायता, पेंशन वृद्धि और क्षेत्र में डिग्री कॉलेज की स्थापना को अपने चुनावी मुद्दे के रूप में पेश कर रहे हैं. कुर्मी समाज में उनका मजबूत जनाधार और अतिपिछड़ा-सवर्ण वर्ग का समर्थन उन्हें ताकत देता है. राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यदि वे अपने कोर वोटर बनाये रखने में सफल रहे, तो मुकाबला बेहद करीबी हो सकता है. भूमिहार समाज की भूमिका भी इस बार निर्णायक मानी जा रही है. कांग्रेस ने इं संजीव सिंह को इसी समाज से मैदान में उतारकर भूमिहार वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश की है. यदि महागठबंधन के कोर वोटर कांग्रेस प्रत्याशी की ओर झुकते हैं, तो भूमिहार वोट भी उसी दिशा में जा सकते हैं. हालांकि, यह संभावना भी बनी है कि भूमिहार वोट दो हिस्सों में बंट जाएं. इसी बीच, निर्दलीय उम्मीदवार और पूर्व मंत्री वृषिण पटेल त्रिकोणीय मुकाबले में सक्रिय हैं. वे क्षेत्र में लगातार जनसंपर्क कर रहे हैं और कुर्मी समाज में अपनी पैठ मजबूत कर रहे हैं. कुल मिलाकर, वैशाली विधानसभा क्षेत्र में चुनाव का मौहाल अनिश्चित और प्रतिस्पर्धात्मक है. जातीय समीकरण और प्रवासी मतदाताओं की सक्रियता ने चुनावी हवा का रुख अभी तक तय नहीं किया है. सभी प्रमुख दल और उम्मीदवार पूरी ताकत के साथ मतदाताओं को अपने पक्ष में करने में जुटे हैं. यह बार का चुनाव निश्चित ही कांटे का और निर्णायक साबित होने वाला है.

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