Mushroom Production Training : हाजीपुर के कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) हरिहरपुर में मशरूम उत्पादन एवं मूल्य संवर्धन पर आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल समापन हुआ. प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को मशरूम उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीकों के साथ-साथ व्यावहारिक अभ्यास भी कराया गया. कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को स्वरोजगार के नए अवसरों से जोड़ना रहा.
तीन दिवसीय मशरूम प्रशिक्षण कार्यक्रम का हुआ समापन
केवीके हरिहरपुर में आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन शुक्रवार को किया गया. कार्यक्रम का संचालन वैज्ञानिक डॉ. कविता वर्मा ने किया. प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को मशरूम उत्पादन की आधुनिक और वैज्ञानिक तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी गई.
उत्पादन की पूरी प्रक्रिया का कराया गया व्यावहारिक अभ्यास
प्रशिक्षण में मशरूम की उपयुक्त प्रजाति का चयन, गुणवत्तापूर्ण स्पॉन की पहचान, सब्सट्रेट की तैयारी, पाश्चुरीकरण, स्पॉन मिलाने की विधि, बैग भराई, स्पॉन रन, पिनहेड निर्माण, फलन, तुड़ाई, पैकेजिंग, भंडारण और मूल्य संवर्धन तक की पूरी प्रक्रिया को हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग के माध्यम से समझाया गया. इससे प्रतिभागियों को व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त हुआ.
प्रतिभागियों को वितरित किए गए प्रमाणपत्र
प्रशिक्षण के समापन अवसर पर उपनिदेशक उद्यान बामेती रंजीत कुमार पंडित, बीएओ अजरा जुल्फिकार तथा वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. अनिल कुमार सिंह ने प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए. अधिकारियों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम की सराहना करते हुए प्रतिभागियों से उनके अनुभव और सुझाव भी लिए.
ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के लिए बेहतर अवसर
अधिकारियों ने कहा कि मशरूम उत्पादन कम लागत, कम जगह और सीमित संसाधनों में शुरू किया जा सकने वाला लाभकारी व्यवसाय है. इससे ग्रामीण युवा और महिलाएं स्वरोजगार शुरू कर अपनी आय बढ़ा सकते हैं. उन्होंने कृषि आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया.
प्रशिक्षण के बाद हुआ मूल्यांकन
प्रशिक्षण के समापन पर प्रतिभागियों का पोस्ट-ट्रेनिंग इवैल्यूएशन आयोजित किया गया. इसके माध्यम से प्रशिक्षण के दौरान अर्जित ज्ञान और तकनीकी समझ का आकलन किया गया, ताकि भविष्य में कार्यक्रमों को और प्रभावी बनाया जा सके.
बीज एवं उर्वरक विक्रेता प्रशिक्षण का भी किया निरीक्षण
उपनिदेशक उद्यान रंजीत कुमार पंडित और बीएओ अजरा जुल्फिकार ने केवीके में चल रहे बीज एवं उर्वरक विक्रेता प्रशिक्षण कार्यक्रम का भी निरीक्षण किया. उन्होंने कहा कि जिले के अधिक से अधिक ग्रामीण युवा इस प्रशिक्षण में भाग लेकर खाद, बीज और कीटनाशक विक्रेता के रूप में अपना व्यवसाय शुरू कर सकते हैं.
वैज्ञानिकों का मिला सहयोग
कार्यक्रम को सफल बनाने में वैज्ञानिक कुमारी नम्रता, डॉ. कविता वर्मा, इशिता सिंह, रमाकांत, सोनू, मोहित, आरती और दीपक ने सक्रिय भूमिका निभाई.
