Hajipur News: मक्का की फसल को विभिन्न प्रकार के हानिकारक कीटों और व्याधियों से बचाने तथा पर्यावरण अनुकूल तरीकों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हाजीपुर में विशेष 'किसान पाठशाला' का आयोजन किया गया. कृषि विभाग के मार्गदर्शन में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में क्षेत्र के प्रगतिशील किसानों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया. कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य किसानों को रासायनिक दवाओं के अंधाधुंध इस्तेमाल से बचाते हुए वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से फसल सुरक्षा के उपाय सिखाना रहा.
फॉल आर्मीवर्म की पहचान और आर्थिक क्षति स्तर की निगरानी पर बल
पाठशाला में उपस्थित कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को मक्का के सबसे खतरनाक कीट 'फॉल आर्मीवर्म' सहित अन्य प्रमुख कीटों की समय पर पहचान, उनके जीवन-चक्र और फसल को पहुंचाने वाले नुकसान के बारे में विस्तार से समझाया. विशेषज्ञों ने सलाह दी कि किसान अपने खेतों की नियमित रूप से निगरानी करें. कीटनाशकों का प्रयोग तभी किया जाना चाहिए जब कीटों का प्रकोप 'आर्थिक क्षति स्तर' (ईटीएल) तक पहुंच जाए. बिना सोचे-समझे कीटनाशकों के छिड़काव से फसल के मित्र कीट नष्ट हो जाते हैं और उत्पादन लागत में भी अनावश्यक बढ़ोतरी होती है.
बीज उपचार, फेरोमोन ट्रैप और जैविक नियंत्रण के बताए गए गुर
किसानों को समेकित कीट प्रबंधन (आईपीएम) के विभिन्न घटकों की क्रमवार जानकारी दी गई. इसमें प्रमाणित एवं स्वस्थ बीजों के चयन, बुआई पूर्व अनिवार्य बीज उपचार, समय पर बुआई तथा खेत में प्रकाश प्रपंच (लाइट ट्रैप) और फेरोमोन ट्रैप लगाने की वैज्ञानिक विधि समझाई गई. विशेषज्ञों ने कहा कि फेरोमोन ट्रैप की मदद से कीटों की संख्या का आसानी से आकलन किया जा सकता है और जैविक नियंत्रण उपायों से कीटों को प्रारंभिक अवस्था में ही खत्म किया जा सकता है. रासायनिक कीटनाशकों के छिड़काव के दौरान सही मात्रा, उचित समय और व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों के उपयोग पर भी बल दिया गया.
लागत में कमी और बेहतर उत्पादन के लिए वैज्ञानिक उपाय जरूरी
कार्यक्रम के समापन सत्र में कृषि अधिकारियों ने कहा कि समेकित कीट प्रबंधन अपनाने से किसानों की खेती की लागत घटती है, मित्र कीटों व मिट्टी की उर्वरा शक्ति का संरक्षण होता है और गुणवत्तापूर्ण उपज प्राप्त होती है. कृषि पदाधिकारियों एवं वैज्ञानिकों ने किसानों द्वारा मक्का की फसल को लेकर पूछे गए व्यावहारिक प्रश्नों और शंकाओं का समाधान किया तथा सभी से आधुनिक एवं वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाने का आह्वान किया.
