राजापाकर (हाजीपुर) से नीरज कुमार की रिपोर्ट
Hajipur News : कृषि विज्ञान केंद्र वैशाली में शुक्रवार को आत्मा वैशाली एवं कृषि विज्ञान केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में जिला स्तरीय प्राकृतिक खेती कार्यशाला एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम के अंतर्गत खेत बचाओ अभियान के तहत संतुलित उर्वरक उपयोग जैविक खेती एवं प्राकृतिक खेती विषयों पर किसानों को जागरूक किया गया.
प्राकृतिक खेती पर विशेषज्ञों ने किसानों को दी जानकारी
कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि जिला अध्यक्ष श्री अजय कुशवाहा, प्रदेश कार्यक्रम पदाधिकारी श्री नंदन कृष्णा, जिला अध्यक्ष किसान मोर्चा श्री भारतेंदु ऋतुराज, डॉ अनिल कुमार सिंह प्रधान, डॉक्टर शशिकांत ठाकुर प्रभारी पदाधिकारी केला अनुसंधान केंद्, डॉ विकास कुमार जिला कृषि पदाधिकारी, श्री प्रशांत कुमार झा जिला उद्यान पदाधिकारी, राष्ट्रपति से सम्मानित किसान श्री संजीव कुमार के द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया. इस कार्यक्रम का मंच संचालन आत्मा, वैशाली के परियोजना निदेशक श्री सियाराम साहू ने किया.
‘जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान’ के मंत्र के साथ किसानों को मिला आधुनिक खेती का संदेश
कार्यशाला में उपस्थित अतिथियों का स्वागत डॉ. विकास कुमार जिला कृषि पदाधिकारी वैशाली द्वारा किया गया. उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने तथा मृदा स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए संतुलित उर्वरकों के उपयोग पर बल दिया. मुख्य अतिथि श्री अजय कुशवाहा ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि देश में खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाने में किसानों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री के प्रसिद्ध नारे “जय जवान, जय किसान” तथा पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा दिए गए “जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान” के संदेश का उल्लेख करते हुए किसानों से वैज्ञानिक पद्धति पर आधारित खेती अपनाने एवं संतुलित उर्वरकों के प्रयोग पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया.
जैविक खेती अपनाने की अपील
उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर विशेष बल दे रहे हैं. इस संदर्भ में उन्होंने किसानों से रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा प्राकृतिक एवं जैविक खेती की ओर अग्रसर होने का आग्रह किया. उन्होंने बताया कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से मिट्टी की उर्वरता में कमी आती है तथा मानव स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. इसलिए मृदा स्वास्थ्य संरक्षण पर्यावरण संतुलन एवं सतत कृषि विकास के लिए प्राकृतिक एवं जैविक खेती को अपनाना समय की आवश्यकता है.
किसानों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण
डॉ.एस.के. ठाकुर प्रभारी पदाधिकारी केला अनुसंधान केंद्र गोरौल ने किसानों को प्राकृतिक खेती में स्थानीय संसाधनों के उपयोग पर बल देते हुए बताया कि देसी गाय आधारित जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत एवं वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग कर मिट्टी की उर्वरा शक्ति एवं जैविक सक्रियता को बढ़ाया जा सकता है. वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. अनिल कुमार सिंह ने रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से मिट्टी जल एवं वायु प्रदूषण तथा मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों की विस्तार से चर्चा की.
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को किया जागरूक
उन्होंने कहा कि रासायनिक खेती के कारण विभिन्न गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है इसलिए किसानों को जैविक एवं प्राकृतिक खेती की ओर अग्रसर होना चाहिए जिला कृषि पदाधिकारी डॉ. विकास कुमार ने संतुलित उर्वरक उपयोग पर जोर देते हुए बताया कि फॉस्फेट सॉल्युबिलाइजिंग बैक्टीरिया मिट्टी में उपस्थित जटिल फॉस्फोरस को पौधों के लिए उपलब्ध रूप में परिवर्तित करता है. वहीं राइजोबियम कल्चर के उपयोग से उर्वरकों की उपयोग दक्षता 20-30 प्रतिशत तक बढ़ जाती है.
बड़ी संख्या में जुटे किसान
उन्होंने कहा कि जैव उर्वरकों के प्रयोग से जल प्रदूषण में कमी आती है तथा पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है. जिला उद्यान पदाधिकारी श्री प्रशांत कुमार झा ने किसानों को सलाह दी कि वे मिट्टी जांच रिपोर्ट के आधार पर ही उर्वरकों का प्रयोग करें. ताकि उत्पादन लागत कम हो तथा मृदा स्वास्थ्य बेहतर बना रहे. कार्यक्रम में प्रगतिशील किसान श्री शंकर किशोर चौधरी, श्री अवधेश सिंह, श्री हरिवंश नारायण सिंह, श्री द्वारिका सिंह, श्री राजेश कुमार सिंह, श्री प्रभुदयाल सिंह, श्रीमती अनिता कुमारी, श्री विजय कुमार साह सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे.
मिट्टी, पर्यावरण और स्वास्थ्य बचाने के लिए प्राकृतिक खेती जरूरी: विशेषज्ञ
इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र, वैशाली के वैज्ञानिक कुमारी नम्रता, डॉ. कविता वर्मा, डॉ. जोना देखो सहित कृषि एवं उद्यान विभाग के अनेक पदाधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे. कार्यक्रम का समापन किसानों द्वारा प्राकृतिक एवं जैविक खेती को अपनाने के संकल्प के साथ हुआ.
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