Hajipur News:(राहुल कुमार राय) अपने स्वाद एवं लाली के लिए मशहूर पान की खेती कर किसान अच्छी कमाई कर रहे है. गोरौल प्रखंड क्षेत्र के मशहूर गांव धाने गोरौल, जहां 80 प्रतिशत लोग पान के खेती पर निर्भर है. पान की खेती कर इस गांव के किसान अपनी हर एक शोक पूरी करते है. जानकारी के अनुसार प्रखंड के धाने गोरौल के अलावे आदमपुर, लोदीपुर, बेलवर, बरेबा सहित कई जगहों पर पान की खेती की जाती है. किसान इसे नगदी फसल मानते है. गोरौल के पान की मांग काफी ज्यादा है. बताया जा रहा है कि सैकड़ो परिवार पान की खेती कर अपनी आजीविका संभाल रही है.
नेपाल तक जाती है धाने गोरौल गांव की पान
स्थानीय बमबम चौरसिया, रामजन्म चौरसिया, शंभू चौरसिया, उर्मिला देवी, ईश्वर भगत सहित दर्जनों किसानाें ने बताया कि यहां का पान मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, समस्तीपुर, दरभंगा, मोतिहारी, बेतिया, नेपाल सहित दर्जनों जिले में भी भेजी जाती है. किसानों ने बताया कि अभी मलमास चल रहा है. अभी लग्न का समय नही है. बाजार अभी मंदा चल रहा है. मंदिरों में आयोजित पूजा पाठ, शादी-ब्याह में भी पान की मांग काफी रहती है. मलमास के बाद पुनः पान की मांग काफी बढ़ जायेगी. बताया जा रहा है कि बारात जाने से लेकर शादी तक पान का जलवा दिखता है. किसानों ने बताया कि इतना महत्वपूर्ण फसल को आजतक सरकार कृषि का दर्जा नही दिया है, जिसका मलाल किसानों में साफ झलकता है. खेतों में हरे भरे पान का पत्ते लोगो का मन मोह लेता है.
पान की खेती करना जितना बड़ा फायदेमंद है उतना ही जोखिम
किसानों ने बताया कि पान की खेती जितना फायदेमंद है उतना ही बड़ा जोखिम वाला फसल है. यदि समय पर पान पत्ता नही तोड़ा गया तो पत्ता सूखकर बर्बाद हो जाता है. जिससे किसानों को बड़ा नुकसान का सामना करना पड़ता है. यह खेती अन्य खेती से भिन्न होती है. किानों ने बताया कि घास-फूस, बांस के झोंपड़ीनुमा घेराबंदी कर पान की खेती की जाती है. महीनों फसलों की देखभाल के बाद पान का पत्ते को तैयार किया जाता है. जिसके बाद उसे तोड़कर पान मंडियों में बेचा जाता है.
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