हाजीपुर से विनय पटेल की रिपोर्ट
Hajipur News : मनरेगा योजनाओं के प्रभावी संचालन के उद्देश्य से लाखों रुपये की लागत से निर्मित मनरेगा भवन आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है. पटेढ़ी बेलसर प्रखंड की मिश्रौलिया अफजलपुर पंचायत में करीब एक दशक पूर्व बनाए गए मनरेगा भवन की स्थिति ऐसी हो गई है कि यह अब सरकारी कार्यालय कम और पशुओं का तबेला अधिक नजर आता है. भवन के सामने और आसपास गाय, भैंस तथा बकरियां बंधी रहती हैं. स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि भवन का ताला अधिकांश समय बंद रहता है. कई-कई महीनों तक इसमें कोई गतिविधि नहीं होती है. कभी-कभार किसी औपचारिक कार्य के लिए ताला खोला जाता है, लेकिन नियमित रूप से इसका उपयोग नहीं होने के कारण भवन उपेक्षा का शिकार हो गया है. ग्रामीणों ने बताया कि मनरेगा योजना का उद्देश्य मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराना तथा पंचायत स्तर पर योजनाओं के संचालन को सुचारू बनाना है.
गंदगी और उपेक्षा का अंबार, प्रशासन पर उठी उंगली
इसके लिए पंचायतों में मनरेगा भवनों का निर्माण कराया गया था ताकि मजदूरों और संबंधित कर्मियों को एक स्थायी कार्यालय मिल सके.लेकिन मिश्रौलिया अफजलपुर पंचायत का मनरेगा भवन इस उद्देश्य को पूरा करने में पूरी तरह विफल साबित हुआ है. भवन में न तो नियमित रूप से कर्मचारियों की उपस्थिति रहती है और न ही मजदूरों को इससे कोई सुविधा मिल रही है. भवन परिसर में गंदगी का अंबार लगा हुआ है और पशुओं के बंधे रहने से इसकी हालत और खराब होती जा रही है.ग्रामीणों का मानना है कि एक ओर सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर ऐसे भवनों की उपेक्षा सरकारी तंत्र की कार्यशैली पर सवाल खड़े करती है. अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और वर्षों से बंद पड़े इस मनरेगा भवन में विकास की गतिविधियां कब शुरू हो पाती हैं.
