Floods in Vaishali : हाजीपुर में गंगा और गंडक नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से वैशाली जिले में बाढ़ का खतरा फिर बढ़ गया है. गांधी घाट पर गंगा खतरे के निशान से 35 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है, जबकि लालगंज में गंडक खतरे के निशान से सिर्फ तीन सेंटीमीटर नीचे है. जिले के चार प्रखंडों की 13 पंचायतों के 16 गांव आंशिक रूप से प्रभावित बताए गए हैं. प्रशासन ने नाव, SDRF और मेडिकल टीमों की व्यवस्था बढ़ा दी है.
गंगा खतरे के निशान से 35 सेंटीमीटर ऊपर
गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर 48.95 मीटर दर्ज किया गया है. यह खतरे के निशान 48.60 मीटर से 35 सेंटीमीटर अधिक है. यहां जलस्तर 0.83 मिलीमीटर प्रति घंटे की दर से बढ़ रहा है. लगातार वृद्धि ने नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है.
गंडक भी खतरे के करीब पहुंची
लालगंज में गंडक नदी का जलस्तर 50.47 मीटर दर्ज किया गया है. यहां खतरे का निशान 50.50 मीटर है. यानी नदी खतरे के निशान से सिर्फ तीन सेंटीमीटर नीचे बह रही है. हाजीपुर में भी गंडक का जलस्तर 49.11 मीटर दर्ज किया गया है और इसमें बढ़ोतरी जारी है.
चार प्रखंडों के 16 गांव प्रभावित
बढ़ते जलस्तर का असर जिले के चार प्रखंडों की 13 पंचायतों के 16 गांवों पर पड़ा है. इन इलाकों में पानी का आंशिक प्रभाव बताया गया है. राघोपुर प्रखंड सबसे ज्यादा प्रभावित है, जहां 10 पंचायतों के 12 गांव प्रभावित बताए गए हैं. इसके अलावा देसरी, सहदेई बुजुर्ग और बिदुपुर के कुछ गांव भी प्रभावित हैं.
आवागमन के लिए 51 नावें चलाई गईं
प्रभावित इलाकों में लोगों के आवागमन के लिए प्रशासन ने 51 नावों का परिचालन शुरू कराया है. इनमें छह सरकारी और 45 निजी नावें शामिल हैं. जरूरतमंद परिवारों के बीच अब तक 920 पॉलीथीन शीट का वितरण किया गया है. प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री और जरूरी संसाधन भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं.
चार जगहों पर SDRF की टीमें तैनात
आपात स्थिति से निपटने के लिए राघोपुर, हाजीपुर, लालगंज और महनार में SDRF की टीमें तैयार रखी गई हैं. प्रशासनिक और विभागीय टीमें प्रभावित इलाकों में लगातार स्थिति का जायजा ले रही हैं. लोगों और पशुओं के स्वास्थ्य को देखते हुए प्रभावित क्षेत्रों में मेडिकल कैंप भी लगाए गए हैं
मेडिकल कैंप में जांच और दवाओं की व्यवस्था
प्रभावित इलाकों में लगाए गए मेडिकल कैंप में स्वास्थ्य जांच के साथ जरूरी दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं. प्रशासन का फोकस बाढ़ प्रभावित लोगों के साथ पशुओं के स्वास्थ्य पर भी है, ताकि जलस्तर बढ़ने की स्थिति में स्वास्थ्य संबंधी परेशानी को नियंत्रित किया जा सके.
तटबंधों पर 24 घंटे निगरानी
बाढ़ के खतरे को देखते हुए तटबंधों की निगरानी बढ़ा दी गई है. तटबंधों पर कर्मियों और होमगार्ड जवानों की 24 घंटे तैनाती की गई है. बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल के अभियंता और तकनीकी कर्मी लगातार निरीक्षण और गश्ती कर रहे हैं.
गंडक में 1.11 लाख क्यूसेक से अधिक जलश्राव
वाल्मीकिनगर बराज के डाउनस्ट्रीम से गंडक नदी में 1,11,500 क्यूसेक जलश्राव दर्ज किया गया है. पिछले दिनों की तुलना में इसमें वृद्धि हुई है. इसके बाद गंडक के जलस्तर और नदी से जुड़े इलाकों की निगरानी और बढ़ा दी गई है.
24 घंटे सक्रिय है जिला नियंत्रण कक्ष
बाढ़ या किसी भी आपात स्थिति में लोगों की मदद के लिए जिला नियंत्रण कक्ष 24 घंटे सक्रिय है. जरूरत पड़ने पर लोग 06224-260233 और 06224-260234 नंबर पर संपर्क कर सकते हैं. प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में स्थिति पर लगातार नजर रखने की व्यवस्था की है.
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