राघोपुर (वैशाली). बाढ़ राहत सामग्री वितरण में पारदर्शिता लाने, जीआर (GR) सूची को सार्वजनिक करने और अंचलाधिकारी दीपक कुमार की कार्यशैली के विरोध में युवाओं का अनिश्चितकालीन आमरण अनशन रविवार को तीसरे दिन भी जारी रहा. कुमार सत्यम उर्फ सत्यम राणा राय के नेतृत्व में दर्जनों युवा प्रखंड सह अंचल कार्यालय परिसर में अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं. अनशन के दौरान एक अनशनकारी की अचानक तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से पहुंचे चिकित्सकों ने धरनास्थल पर ही उनका उपचार किया.
अनशनकारी पृथ्वी यादव की तबीयत बिगड़ी
आमरण अनशन पर बैठे नीतीश कुमार उर्फ पृथ्वी यादव की तबीयत रविवार को अचानक ज्यादा बिगड़ गई. कमजोरी और डिहाइड्रेशन की शिकायत पर पीएचसी के डॉक्टरों की टीम मौके पर पहुंची और उनके स्वास्थ्य की गहन जांच कर आवश्यक दवाएं व उचित चिकित्सीय परामर्श दिया. इससे पूर्व शनिवार की देर रात भी उनकी तबीयत खराब होने पर मेडिकल टीम ने उपचार किया था. इसके बावजूद आंदोलनकारी अपनी मांगों पर अडिग हैं और इलाज के बाद भी धरनास्थल नहीं छोड़ा.
वार्ता करने पहुंचे कई अधिकारी
शनिवार को प्रभारी एडीएम (आपदा प्रबंधन), बिदुपुर बीडीओ, राघोपुर बीडीओ सीमा कुमारी और सीओ सहित कई वरीय प्रशासनिक अधिकारी युवाओं को समझाने और अनशन समाप्त कराने पहुंचे थे. इस दौरान पूर्व सीओ राजीव रंजन चौधरी भी मौजूद रहे, लेकिन अधिकारियों के आश्वासन के बाद भी सहमति नहीं बन सकी. आंदोलनकारी युवाओं का दो-टूक कहना है कि जब तक जिलाधिकारी स्वयं मौके पर आकर उनकी मांगों पर ठोस और लिखित आश्वासन नहीं देते, तब तक आंदोलन खत्म नहीं होगा.
अंचल कर्मी पर भ्रष्टाचार का आरोप
धरना का नेतृत्व कर रहे सत्यम राणा राय ने आरोप लगाया कि वर्तमान सीओ दीपक कुमार की कार्यशैली पूरी तरह तानाशाही और जनविरोधी है. जब वे जागरूक युवाओं की बात नहीं सुनते, तो सीधी-सादी ग्रामीण जनता की क्या सुनेंगे. युवाओं ने पूर्व सीओ राजीव रंजन चौधरी के कार्यकाल की सराहना की. इसके साथ ही युवाओं ने अंचल कार्यालय के एक कर्मी पर दाखिल-खारिज और जमीन परिमार्जन के नाम पर लाखों रुपये की अवैध वसूली और जमीन के रिकॉर्ड में जानबूझकर हेरफेर कर विवाद पैदा करने का गंभीर आरोप लगाया.
अनशन तुड़वाने के लिए दबाव और प्रलोभन का आरोप
सत्यम राणा राय ने प्रशासनिक अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि दिन में तो सामान्य बातचीत की जाती है, लेकिन रात होते ही दो से तीन बार धरना समाप्त कराने के लिए अनुचित दबाव बनाया जा रहा है. अनशनकारियों का कहना है कि प्रशासन ने आंदोलन को कमजोर करने के लिए परिजनों पर दबाव बनाने और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को प्रलोभन देने जैसे तमाम हथकंडे अपनाए हैं, लेकिन युवा दियारा के हक की लड़ाई से पीछे नहीं हटेंगे.
