Hajipur News: गंगा नदी के बढ़े जलस्तर के कारण वैशाली जिले के महनार नगर परिषद क्षेत्र के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी तेजी से फैल गया है. बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए रविवार की सुबह नगर परिषद सभापति रमेश कुमार राय ने प्रभावित बस्तियों में स्वयं पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया. सभापति ने घुटनों तक भरे पानी के बीच पैदल चलकर नगर क्षेत्र के वार्ड संख्या 09, 19, 20, 21 एवं 27 का सघन निरीक्षण किया. इस दौरान उन्होंने बाढ़ के पानी से घिरे सैकड़ों परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और प्रशासनिक सहायता दिलाने का पूरा भरोसा दिया.
फतेहपुर कमाली से जहाज घाट तक जलभराव, 300 से अधिक घर प्रभावित
निरीक्षण के दौरान सामने आया कि नगर क्षेत्र के 300 से अधिक मकान बाढ़ के पानी से सीधे तौर पर प्रभावित हो चुके हैं. फतेहपुर कमाली से लेकर जहाज घाट स्थित शिव मंदिर तक बाढ़ का पानी फैल जाने से लोगों का घरों से निकलना दूभर हो गया है. वहीं वार्ड संख्या 21 अंतर्गत जंगलिया टोला में अधिकांश घर चारों तरफ से पानी से घिरे हुए हैं. सड़क के दक्षिणी हिस्से में बसी आबादी बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित हुई है. ब्रह्म स्थान से लेकर फकीरा चौक तक मुख्य मार्ग पर करीब डेढ़ से दो फीट तक पानी बह रहा है, जिससे पैदल व दोपहिया वाहनों का आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है और दैनिक जीवन अस्त-व्यस्त हो चुका है.
राशन, पशु चारा और मेडिकल कैंप शुरू कराने की मांग
बाढ़ प्रभावित नागरिकों ने सभापति के समक्ष अपनी बुनियादी जरूरतें रखते हुए बताया कि घरों में पानी भर जाने से भोजन बनाने की समस्या खड़ी हो गई है. मवेशियों के लिए चारे की भारी किल्लत है और जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है. सभापति रमेश कुमार राय ने जिला व अनुमंडल प्रशासन से मांग की कि प्रभावित वार्डों में तुरंत सूखा राशन के पैकेट, तिरपाल (पॉलिथीन शीट्स) और पशुपालकों के लिए पर्याप्त सूखा व हरा चारा उपलब्ध कराया जाए. इसके अलावा प्रभावित इलाकों में मानव व पशु स्वास्थ्य के लिए तुरंत अलग-अलग मेडिकल कैंप लगाए जाएं तथा प्रभावित परिवारों को आपदा प्रबंधन के तहत सहायता राशि दी जाए.
राहत कार्य में देरी होने पर प्रशासन के घेराव की दी चेतावनी
सभापति रमेश कुमार राय ने दो टूक शब्दों में प्रशासनिक अधिकारियों को चेतावनी दी कि बाढ़ पीड़ितों की सहायता में किसी भी तरह की हीलाहवाली बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन ने प्रभावित वार्डों में शीघ्र राहत सामग्री का वितरण, मेडिकल कैंप की व्यवस्था और सहायता राशि देने की प्रक्रिया शुरू नहीं की, तो नगर परिषद के जनप्रतिनिधि और स्थानीय नागरिक सड़कों पर उतरने को बाध्य होंगे. उन्होंने साफ किया कि जरूरत पड़ने पर अनुमंडल प्रशासन का घेराव कर व्यापक आंदोलन का रास्ता अख्तियार किया जाएगा.
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