Bihar News: (शेखर शुक्ला) हाजीपुर में औद्योगिक थाना क्षेत्र में कंप्यूटर व्यवसायी के साथ हुई लूटपाट मामले का पुलिस ने खुलासा करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. गिरफ्तार आरोपियों के पास से घटना में इस्तेमाल किया गया एक देसी कट्टा, एक जिंदा कारतूस और एक बाइक बरामद की गई है. पकड़े गए आरोपियों की पहचान नगर थाना क्षेत्र के पोखरा मोहल्ला निवासी गणेश सिंह के पुत्र सोनू कुमार तथा बिदुपुर थाना क्षेत्र के दाउदनगर निवासी रामलाल सिंह के पुत्र रवि सिंह के रूप में हुई है.
7 अप्रैल को हुई थी लूट की घटना
सदर एसडीपीओ-1 सुबोध कुमार ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि बीते 7 अप्रैल को औद्योगिक थाना क्षेत्र के राजपूत कॉलोनी के समीप दुकान बंद कर घर लौट रहे कंप्यूटर व्यवसायी रजनीश कुमार जायसवाल से देर शाम लूटपाट की घटना हुई थी. दो बाइक पर सवार पांच अपराधियों ने हथियार के बल पर व्यवसायी को रोक लिया और उनके पास से हार्ड डिस्क, बाइक की चाबी, डायरी, जमीन के कागजात, इनवॉइस बिल तथा टिफिन लूटकर फरार हो गए थे. घटना के बाद पीड़ित व्यवसायी ने औद्योगिक थाना में अज्ञात बदमाशों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी.
एसपी के निर्देश पर गठित हुई विशेष टीम
मामला दर्ज होने के बाद पुलिस अधीक्षक विक्रम सिहाग के निर्देश पर सदर एसडीपीओ-1 सुबोध कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया. इस टीम में औद्योगिक थानाध्यक्ष अरविंद पासवान, एएसआई बी.एन. झा सहित अन्य पुलिसकर्मियों को शामिल किया गया था. पुलिस ने मानवीय सूचना और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर कार्रवाई करते हुए घटना में शामिल दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया.
पूछताछ में कबूला जुर्म
थाना लाकर पूछताछ किए जाने पर दोनों आरोपियों ने कंप्यूटर व्यवसायी से हुई लूटपाट में अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली. आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने घटना में प्रयुक्त देसी कट्टा, एक जिंदा कारतूस तथा बुलेट मोटरसाइकिल बरामद की.
अन्य आरोपियों की तलाश में छापेमारी जारी
पूछताछ के दौरान गिरफ्तार आरोपियों ने घटना में शामिल अन्य साथियों के बारे में भी पुलिस को जानकारी दी है. पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है. सदर एसडीपीओ-1 सुबोध कुमार ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी रवि सिंह के खिलाफ बिदुपुर थाना में पहले से भी लूटपाट के कई मामले दर्ज हैं और पुलिस को उसकी लंबे समय से तलाश थी. दोनों आरोपियों को पूछताछ के बाद न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया.
