बिहार के इन 8 जिलों से गुजरेगा गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे, जमीन मालिकों को कब मिलेगा मुआवजा

Gorakhpur Siliguri Expressway: गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे परियोजना को लेकर बिहार में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है. पूर्वी चंपारण में खेसरा पंजी तैयार करने का काम तेज कर दिया गया है. 520 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे आठ जिलों से होकर गुजरेगा.

Gorakhpur Siliguri Expressway: गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे परियोजना को लेकर बिहार में काम तेजी से आगे बढ़ रहा है. पूर्वी चंपारण जिले में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है. जिला प्रशासन ने सभी CO को एक महीने के भीतर खेसरा पंजी तैयार कर जिला मुख्यालय को सौंपने का निर्देश दिया है, ताकि आगे की प्रक्रिया समय पर पूरी हो सके.

परियोजना के लिए अधिग्रहित होने वाली जमीन का मूल्य तय करने का काम पूरा हो चुका है. इसके लिए बनाई गई पांच सदस्यीय टीम ने अपना सर्वे पूरा कर लिया है. अब जमीन का डिजिटल और भौतिक रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है, जिससे अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके.

बिहार के 8 जिलों से होकर गुजरेगा एक्सप्रेसवे

अधिकारियों के मुताबिक खेसरा पंजी तैयार होने के बाद जमीन मालिकों की पहचान और जमीन के रकबे का मिलान किया जाएगा. इसके बाद यदि कोई आपत्ति होगी तो उसका निपटारा किया जाएगा. सभी प्रक्रिया पूरी होने के बाद जमीन मालिकों को मुआवजा देना शुरू कर दिया जाएगा.

यह एक्सप्रेसवे बिहार के पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज जिलों से होकर गुजरेगा. यह परियोजना राज्य के 39 प्रखंडों और 313 गांवों को बेहतर सड़क नेटवर्क से जोड़ेगी.

520 किलोमीटर लंबा होगा एक्सप्रेसवे

करीब 520 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे के निर्माण पर लगभग 32 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. इस हाईस्पीड सड़क पर वाहन 120 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार से चल सकेंगे, जिससे सफर का समय काफी कम हो जाएगा.

पूर्वी चंपारण जिले में एक्सप्रेसवे की लंबाई करीब 70 किलोमीटर होगी. यह सड़क जिले के 8 अंचलों के 56 राजस्व गांवों से होकर गुजरेगी और आगे शिवहर जिले में प्रवेश करेगी. रूट के अनुसार एक्सप्रेसवे सबसे पहले पहाड़पुर अंचल से जिले में दाखिल होगा.

ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट होने से आसान होगा काम

यह पूरी परियोजना ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के रूप में बनाई जा रही है. यानी इसका रूट घनी आबादी वाले इलाकों से अलग होगा. इससे जमीन अधिग्रहण में कम दिक्कत आएगी और निर्माण कार्य भी तेजी से पूरा होने की उम्मीद है.

इस एक्सप्रेसवे के बनने के बाद उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी की दूरी 520 किलोमीटर हो जाएगी. इससे उत्तर प्रदेश, बिहार और पूर्वोत्तर भारत के बीच सड़क संपर्क पहले से ज्यादा तेज और बेहतर होगा.

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अधिकारियों ने दिया अपडेट

बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से माल ढुलाई का खर्च और समय दोनों कम होंगे. एक्सप्रेसवे के किनारे लॉजिस्टिक पार्क, वेयरहाउस, औद्योगिक कॉरिडोर और कमर्शियल हब विकसित होने की संभावना है. इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.

पूर्वी चंपारण के जिला भू-अर्जन पदाधिकारी (ADLO) कुमार विमल कांत ने बताया कि भूमि अधिग्रहण से जुड़ी सभी तकनीकी प्रक्रियाएं तय समय के भीतर पूरी करने की कोशिश की जा रही है. खेसरा पंजी तैयार होते ही आगे की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी.

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लेखक के बारे में

Published by: Paritosh Shahi

परितोष शाही डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. अभी प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम में काम कर रहे हैं. देश और राज्य की राजनीति, सिनेमा और खेल (क्रिकेट) में रुचि रखते हैं.
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