गोपालगंज : उचकागांव बहनों ने भाई की कलाई पर बांधा स्नेह सूत्र, भाइयों ने लिया रक्षा का संकल्प

रक्षाबंधन का पावन पर्व उचकागांव में अपार श्रद्धा और उल्लास से संपन्न हुआ, जहां बहनों ने भाइयों की कलाई पर स्नेह सूत्र बांधकर लंबी उम्र की कामना की। भाइयों ने जीवन भर रक्षा का संकल्प लेकर बहनों को उपहार दिए।

भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक रक्षाबंधन का त्योहार उचकागांव व में अपार श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ..शुक्रवार सुबह से ही ग्रामीण और शहरी इलाकों के घर-घर में उत्सव जैसा माहौल नजर आया. तड़के स्नान-ध्यान के बाद बहनें पूजा की थाली सजाने, राखी और मिठाइयों की तैयारियों में जुटी रहीं. शुभ मुहूर्त के अनुसार रक्षा सूत्र बांधने की प्रक्रिया शुरू हुई, जो दो पहर तक अनवरत चलती रही. बहनों ने भाइयों की कलाई पर रेशमी धागे बांधकर उनकी लंबी उम्र, स्वास्थ्य और सुखद भविष्य की ईश्वर से कामना की. बदले में भाइयों ने भी बहनों को उपहार दिए और जीवन भर उनकी रक्षा करने का दृढ़ संकल्प लिया.

बाजार में दिनभर रही गहमागहमी

त्योहार को लेकर सड़कों पर दिनभर गहमागहमी बनी रही. दूर-दराज के क्षेत्रों या ससुराल में रहने वाली बहनों से मिलने के लिए भाई सुबह से ही गाड़ियों और बसों के जरिए अपने गंतव्य की ओर निकलते दिखे.इस दौरान बसों, ट्रेनों और सड़कों पर भारी चहल-पहल दर्ज की गई. शहर और कस्बे के चौराहों से लेकर गलियों तक का माहौल रक्षाबंधन के सुरीले गीतों से गुंजायमान रहा. "बहना ने भाई की कलाई पर प्यार बांधा है... "भइया मेरे राखी के बंधन को न भुलाना... " और "ये राखी बंधन है ऐसा... " जैसे प्रसिद्ध गीतों ने वातावरण में एक अलग ही भावनात्मक मिठास और उत्साह घोल दिया.

रक्षाबंधन पर्व का पौराणिक महत्व

भारतीय संस्कृति में इस पर्व का पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व बेहद खास रहा है. मान्यता है कि जब सुदर्शन चक्र से श्रीकृष्ण की उंगली कट गई थी, तब द्रौपदी ने अपने आंचल का टुकड़ा फाड़कर उनकी उंगली पर बांधा था. श्रीकृष्ण ने चीर हरण के समय द्रौपदी की लाज बचाकर इस स्नेह सूत्र का मान रखा था.आज भी दुनिया भर के भाई-बहन इस पवित्र परंपरा को पूरे सम्मान के साथ सहेजे हुए हैं.


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By प्रशांत पाठक

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