Gopalganj Line Bazar-Thawe Road : गोपालगंज के उचकगांव प्रखंड की लाइफ लाइन कही जाने वाली करीब 13 किलोमीटर लंबी लाइन बाजार-थावे सड़क लंबे समय से बदहाली का सामना कर रही है. सड़क जर्जर होने से रोजाना गुजरने वाले लोगों को परेशानी के साथ दुर्घटना का खतरा भी बना रहता है. सबसे बड़ी अड़चन यह है कि सड़क का हिस्सा दो अलग-अलग अनुमंडलों में आता है. इसी विभागीय पेच के कारण सड़क का चौड़ीकरण और जीर्णोद्धार अब तक आगे नहीं बढ़ सका है.
13 किलोमीटर की सड़क पर सफर बना चुनौती
लाइन बाजार-थावे सड़क उचकगांव प्रखंड के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है. इस मार्ग से स्थानीय लोगों के साथ जिले के पश्चिमी हिस्से से आने-जाने वाले लोग भी आवागमन करते हैं. सड़क की जर्जर स्थिति के कारण राहगीरों और वाहन चालकों को खराब रास्ते पर सफर करना पड़ रहा है.
दो अनुमंडलों में बंटा होना बनी सबसे बड़ी अड़चन
सड़क का एक हिस्सा हथुआ अनुमंडल में आता है, जबकि दूसरा हिस्सा गोपालगंज अनुमंडल के अंतर्गत है. लाइन बाजार से जमसड़, त्रिलोकपुर और अरना बाजार होते हुए पिपराही पुल तक का हिस्सा हथुआ अनुमंडल में है. वहीं पिपराही पुल से थावे मोड़ तक का शेष हिस्सा गोपालगंज अनुमंडल में आता है.
विभागीय हस्तांतरण के पेंच में फंसा चौड़ीकरण
दो अनुमंडलों में सड़क के बंटे होने के कारण इसके निर्माण और चौड़ीकरण को लेकर विभागीय स्तर पर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है. सड़क अभी ग्रामीण कार्य विभाग के जिम्मे बतायी जा रही है. हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी नहीं होने से सड़क को चौड़ा करने की योजना आगे नहीं बढ़ पा रही है.
बैठकों में बार-बार उठता रहा सड़क का मुद्दा
उचकगांव प्रखंड में आयोजित बीस सूत्री और बीडीसी की बैठकों में जनप्रतिनिधियों की ओर से इस सड़क के निर्माण और चौड़ीकरण का मुद्दा कई बार उठाया गया. इसके बावजूद अब तक सड़क की स्थिति सुधारने को लेकर कोई ठोस विभागीय कार्रवाई सामने नहीं आयी है.
चुनाव के दौरान काम शुरू होने की उम्मीद जगी थी
विधानसभा चुनाव के दौरान सड़क चौड़ीकरण के प्रस्ताव स्वीकृत होने और जल्द काम शुरू होने की बात कही गयी थी. इससे स्थानीय लोगों में सड़क की स्थिति सुधरने की उम्मीद जगी थी. लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद योजना पर आगे कोई ठोस प्रगति नहीं होने से लोगों में निराशा बढ़ गयी.
पश्चिमी गोपालगंज के लिए अहम मार्ग
लाइन बाजार-थावे सड़क गोपालगंज जिले के पश्चिमी क्षेत्र को जोड़ने वाले प्रमुख मार्गों में शामिल है. सड़क की बदहाली का असर केवल उचकगांव प्रखंड तक सीमित नहीं है. पश्चिमांचल के कई गांवों और बाजारों से आने-जाने वाले लोगों को भी खराब सड़क के कारण परेशानी का सामना करना पड़ता है.
पंचायत प्रतिनिधियों से सवाल पूछ रहे ग्रामीण
सड़क की लगातार खराब होती स्थिति को लेकर अब स्थानीय लोगों का आक्रोश पंचायत प्रतिनिधियों के खिलाफ भी दिखने लगा है. ग्रामीण पंचायत प्रतिनिधियों से सड़क की स्थिति को लेकर सवाल पूछ रहे हैं. लोगों के बीच यह सवाल आम है कि आखिर सड़क कब बनेगी और उन्हें कब राहत मिलेगी.
'का मुखिया जी रोड के इहे हाल रही'
स्थानीय लोगों की नाराजगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पंचायत प्रतिनिधियों को देखते ही कई लोग सड़क की बदहाली को लेकर सवाल करने लगते हैं. ग्रामीणों की जुबान पर यह सवाल रहता है कि "का मुखिया जी रोड के इहे हाल रही". हालांकि, सड़क के विभागीय स्तर पर किस प्रक्रिया में फंसे होने की पूरी जानकारी आम लोगों तक नहीं पहुंच पायी है.
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