मनिंद्र मिश्रा की तलाश में एसटीएफ की हुई इंट्री, गुजरात और मुंबई में रेड शुरू

लालाछापर में स्वर्ण व्यवसायी से लूट और ग्रामीण की हत्या के मामले में अब बिहार पुलिस की सबसे भरोसेमंद विंग एसटीएफ की इंट्री हो गयी है.

भोरे. लालाछापर में स्वर्ण व्यवसायी से लूट और ग्रामीण की हत्या के मामले में अब बिहार पुलिस की सबसे भरोसेमंद विंग एसटीएफ की इंट्री हो गयी है. कुख्यात मास्टरमाइंड मनिंद्र मिश्रा उर्फ बड़का भैया और उसके गिरोह के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए एसटीएफ ने मोर्चा संभाल लिया है. पुलिस की चार विशेष टीमों के साथ मिलकर एसटीएफ की टीम गुजरात, उत्तर प्रदेश और बिहार के विभिन्न जिलों में सघन छापेमारी कर रही है. मनिंद्र मिश्रा का नेटवर्क अंतरराज्यीय होने के कारण पुलिस मुख्यालय ने एसटीएफ को इस केस में लगाया है. गिरफ्तार अपराधियों ने स्वीकार किया था कि साजिश गुजरात के उमरगांव में रची गयी और हथियार मुंबई से आये थे. इसी कड़ी को जोड़ते हुए एसटीएफ की एक टीम गुजरात रवाना हो गयी है, जबकि दूसरी टीम यूपी के सीमावर्ती जिलों और तीसरी टीम बिहार के संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है. पुलिस को अंदेशा है कि बड़का भैया किसी बड़े शहर में अपना ठिकाना बदल रहा है. कटेया थाना क्षेत्र के सुल्तानपुर निवासी मनिंद्र की गिरफ्तारी के लिए एसडीपीओ आनंद मोहन गुप्ता के नेतृत्व में गठित चार टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं. पुलिस को अंदेशा है कि वह फिर से मुंबई या किसी दूसरे बड़े शहर में जाकर छिप सकता है. उसके पुराने मददगारों और करीबियों को राडार पर लेकर कड़ी पूछताछ की जा रही है.

समाज में शूटर्स की एक नयी पौध तैयार कर रहा था मनिंद्र

लालाछापर स्थित दीपक ज्वेलर्स लूटकांड की जांच में एक बेहद डरावना खुलासा हुआ है. कुख्यात मनिंद्र मिश्रा उर्फ बड़का भैया किशोरों और युवाओं के ब्रेन को वॉश करता था. ब्रेनवाॅश कर अपराध की दुनिया में भर्ती करा रहा है. पुलिस तफ्तीश में यह बात सामने आयी है कि मनिंद्र और मृत गोलू मिश्रा ने इस गिरोह में शामिल कम उम्र के लड़कों को महज कुछ घंटों में 10-10 लाख रुपये दिलाने और रातों-रात अमीर बनाने का सपना दिखाया था. गिरफ्तार अपराधियों के बयानों के मुताबिक, मनिंद्र ऐसे युवाओं को चिह्नित करता है, जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं या जल्दी पैसा कमाना चाहते हैं. उन्हें मुंबई और गुजरात के होटलों में बुलाकर विलासिता भरी जिंदगी का झांसा दिया जाता है. लालाछापर कांड में भी अपराधियों को करोड़ों के फायदे का लालच देकर उनके हाथों में मजदूरी के बजाय पिस्टल थमा दी गयी. मनिंद्र का यह मॉडल समाज और पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गया है.

टेक्निकल सेल और मैन्युअल इनपुट का सहारा

हथुआ एसडीपीओ के नेतृत्व में काम कर रही जिला पुलिस की टीमें टेक्निकल सेल की मदद से मनिंद्र के पुराने कॉल रिकॉर्ड्स और सोशल मीडिया गतिविधियों को खंगाल रही हैं. एसटीएफ अपने स्तर पर ह्यूमन इंटेलिजेंस का इस्तेमाल कर रही है ताकि अपराधी के नेपाल भागने या किसी अन्य राज्य में छिपने से पहले उसे दबोचा जा सके. एसटीएफ की इंट्री के बाद जिले के व्यवसायियों में सुरक्षा को लेकर उम्मीद जगी है. लाला छापर बाजार में पुलिस के अधिकारी बुधवार को भी पहुंच कर लोगों से बातचीत कर उनको सुरक्षा का भरोसा दिलाया. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि एसटीएफ के इस मामले में जुड़ने के बाद अब अपराधियों का बच निकलना नामुमकिन है. पुलिस का लक्ष्य न केवल मनिंद्र को पकड़ना है, बल्कि उसके पूरे आर्थिक सिंडिकेट को ध्वस्त करना है जो रंगदारी और लूट के पैसों पर फल-फूल रहा है.

मुंबई और गुजरात को बनाया अपना ठिकाना

मनिंद्र ने अपने गिरोह का विस्तार केवल बिहार तक सीमित नहीं रखा. लाला छापर कांड की जांच में उसके मुंबई और गुजरात कनेक्शन ने पुलिस को हैरान कर दिया है. गिरफ्तार अपराधियों ने कबूला है कि गुजरात के होटल दर्शन में बैठकर मनिंद्र ने ही लूट की पूरी स्क्रिप्ट लिखी थी. उसने ही मुंबई से जुड़े संपर्कों के जरिए 7 आधुनिक पिस्टल और 200 गोलियां मंगवाई थीं. वह स्थानीय अपराधियों को बड़े शहरों में पनाह और पैसे का लालच देकर अपना मोहरा बनाता है.

राडार पर आया मनिंद्र का पुराना नेटवर्क

एसटीएफ और जिला पुलिस की टीमें मनिंद्र के उन करीबियों को उठा रही हैं, जो उसे लॉजिस्टिक और सूचनाएं प्रदान करते रहे हैं. मनिंद्र, जो कभी मुन्ना मिश्रा का शूटर था और गोपालगंज शहर की प्रसिद्ध मिठाई दुकान के चौधरी पर बमबारी कर सुर्खियों में आया था, अब अपने खुद का संगठित गिरोह के जरिए पुलिस को चुनौती दे रहा है. एसटीएफ की इंट्री के बाद उसके मददगारों में हड़कंप मचा हुआ है.

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By SHAH ABID HUSSAIN

SHAH ABID HUSSAIN is a contributor at Prabhat Khabar.

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