जेल की चहारदीवारी में सब्जी उगा रहे कैदी, खाने में भी मिल रहीं ताजी व हरी सब्जियां

थावे. चनावे गांव स्थित मंडल कारा इन दिनों एक सकारात्मक पहल हो रही है. जेल के अंदर बंद कैदी अब खाली समय का उपयोग करते हुए हरी सब्जियों की खेती में जुटे हैं.

थावे. चनावे गांव स्थित मंडल कारा इन दिनों एक सकारात्मक पहल हो रही है. जेल के अंदर बंद कैदी अब खाली समय का उपयोग करते हुए हरी सब्जियों की खेती में जुटे हैं. जेल परिसर के भीतर तीन से चार कट्ठा खाली जमीन पर बोरो, भिंडी और हरी मिर्च जैसी सब्जियों की खेती की जा रही है. यह पहल न सिर्फ कैदियों को व्यस्त रखने का माध्यम बन रही है, बल्कि उनके भोजन में पौष्टिकता भी जोड़ रही है. जेल अधीक्षक सतेंद्र सिंह ने बताया कि खेती की जिम्मेदारी उन कैदियों को सौंपी गयी है, जिन्हें खेती-बाड़ी का अनुभव है. ऐसे दो से तीन कैदी सब्जियों की देखरेख कर रहे हैं, नियमित रूप से पानी दे रहे हैं और समय पर सब्जियों की कटाई कर रहे हैं. उगायी गयीं सब्जियां जेल के मेस में भेजी जाती हैं, जहां इन्हें भोजन में शामिल किया जाता है. इससे जेल में रहने वाले सभी कैदियों को हर दिन ताजी और हरी सब्जी खाने के लिए मिल रही हैं. इस पहल ने न सिर्फ कैदियों के जीवन में नयी उम्मीद जगायी है, बल्कि आत्मनिर्भरता की ओर एक महत्वपूर्ण कदम भी साबित हो रही है. इससे जेल प्रशासन की छवि भी संवेदनशील और रचनात्मक बनकर उभरी है.

जेल में खेती पर एक नजर

– चनावे मंडल कारा में खाली जमीन पर हो रही है सब्जी की खेती

– इस समय कैदी उगा रहे हैं बोरो, भिंडी और हरी मिर्च

– दो-तीन अनुभवी कैदियों को दी गयी खेती की जिम्मेदारी

– उगायी गयी सब्जियाें का जेल मेस में भोजन के लिए हो रहा इस्तेमाल

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By AWEDHESH KUMAR RAJA

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