Gopalganj News: नाबार्ड के 45वें स्थापना दिवस के अवसर पर गुरुवार को भोरे प्रखंड के सोहनरिया छटियाव गांव में वित्तीय साक्षरता एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जीविका स्वयं सहायता समूह की सदस्याओं, किसानों तथा बिहार ग्रामीण बैंक के अधिकारियों ने भाग लिया. कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीणों को बैंकिंग सेवाओं, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं एवं स्वरोजगार के अवसरों के प्रति जागरूक करना था.
ग्रामीण विकास में नाबार्ड की भूमिका अहम : डीडीएम
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक (डीडीएम) अमन दीप कुमार ने कहा कि नाबार्ड ग्रामीण विकास के लिए बहुआयामी स्तर पर कार्य कर रहा है. उन्होंने बताया कि ग्रामीण आधारभूत संरचना के विकास, वित्तीय समावेशन, वित्तीय साक्षरता, बैंकों को पुनर्वित्त (रीफाइनेंस), आजीविका संवर्द्धन तथा किसानों एवं ग्रामीण समुदाय की आय बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न योजनाओं का प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन किया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि नाबार्ड का लक्ष्य ग्रामीण समाज को आत्मनिर्भर एवं आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है.
नुक्कड़ नाटक के माध्यम से दी बैंकिंग सेवाओं की जानकारी
बिहार ग्रामीण बैंक के सहयोग से आयोजित वित्तीय साक्षरता शिविर में नुक्कड़ नाटक के माध्यम से किसानों एवं ग्रामीणों को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जुड़ने के लाभ बताए गए. साथ ही प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, अटल पेंशन योजना तथा किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई.
फसल बीमा और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर किया गया जागरूक
बिहार ग्रामीण बैंक के वित्तीय साक्षरता केंद्र (एफएलसी) के अधिकारी प्रियंशु राज ने सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लाभ एवं पात्रता के बारे में विस्तार से जानकारी दी. कार्यक्रम में किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के प्रावधानों, फसल सुरक्षा तथा बीमा दावा प्रक्रिया से भी अवगत कराया गया.
वक्ताओं ने किसानों से आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने, स्वरोजगार के अवसरों का लाभ उठाने और अपनी आय बढ़ाने का आह्वान किया. साथ ही आत्मनिर्भर बनने के लिए सरकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ लेने की अपील की.
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