गोपालगंज में बदलेगी नारायणी रिवर फ्रंट की तस्वीर, इको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए 2.66 करोड़ मंजूर, जानिए खास बातें

गोपालगंज के डुमरिया घाट पर नारायणी रिवर फ्रंट को इको पर्यटन के हब के रूप में विकसित किया जा रहा है. 2.66 करोड़ की लागत से नक्षत्र वाटिका, नवग्रह वाटिका और मोक्ष वाटिका का निर्माण होगा, जो भारतीय संस्कृति और पर्यावरण का अनूठा संगम होंगे.

Dumariya Ghat Narayani Riverfront : गोपालगंज जिले के डुमरिया घाट स्थित नारायणी रिवर फ्रंट को इको पर्यटन के एक प्रमुख और आकर्षक केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम उठाया गया है. बिहार सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने गोपालगंज वन प्रमंडल के अंतर्गत आने वाले इस क्षेत्र में नक्षत्र वाटिका, नवग्रह वाटिका और मोक्ष वाटिका के विकास के लिए 2.66 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति एवं व्यय की अनुमति प्रदान कर दी है.

भारतीय संस्कृति और पर्यावरण का अनूठा संगम

नक्षत्र वाटिका, नवग्रह वाटिका और मोक्ष वाटिका भारतीय संस्कृति, ज्योतिष और पर्यावरण का एक अनूठा संगम साबित होंगी. इन विशेष बगीचों में ऐसे पौधे और वृक्ष लगाए जाएंगे, जो न केवल आध्यात्मिक और ज्योतिषीय महत्व रखते हैं, बल्कि पर्यावरण को शुद्ध कर उत्तम स्वास्थ्य का लाभ भी प्रदान करते हैं. यह महत्वपूर्ण कार्य बैकुंठपुर के विधायक व बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी की विशेष पहल से संभव हो पाया है.

2026-27 योजना के तहत होगा क्रियान्वयन

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के उप सचिव राजीव कुमार द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, यह पूरी योजना वित्तीय वर्ष 2026-27 में इको पर्यटन एवं पार्क विकास योजना के अंतर्गत क्रियान्वित की जाएगी. इससे नारायणी रिवर फ्रंट की पूरी तस्वीर बदलने की उम्मीद है.

नक्षत्र वाटिका में 27 नक्षत्रों के प्रतीक पुष्प

सैलानियों के लिए तैयार हो रही नक्षत्र वाटिका में 27 नक्षत्रों के प्रतीक पौधों की विशेष क्यारियां बनाई जाएंगी. इनमें रेवती के लिए महुआ, अश्वनी के लिए कुचिला, भरणी के लिए आंवला, कृतिका के लिए गूलर, रोहिणी के लिए जामुन, मृगशिरा के लिए खैर, आद्रा के लिए शीशम, पुनर्वसु के लिए बांस, पुष्य के लिए पीपल, आश्लेषा के लिए नागकेसर, मघा के लिए बरगद, पूर्वी फाल्गुनी के लिए पलाश, उत्तरी फाल्गुनी के लिए पाकड़, हस्त के लिए रीठा और चमेली, स्वाति के लिए अर्जुन, विशाखा के लिए कटाई, अनुराधा के लिए मौलश्री, ज्येष्ठा के लिए चीड़ और सेमल, मूल के लिए साल, पूर्वाषाढ़ा के लिए जलवेतर, उत्तराषाढ़ा के लिए कटहल, श्रवण के लिए शमी, धनिष्ठा के लिए मदार, शतभिषक के लिए कदंब, चित्रा के लिए बेल, पूर्वी भाद्रपद के लिए आम और उत्तरी भाद्रपद के लिए नीम शामिल हैं। इन सभी 27 नक्षत्रों के प्रतीक पुष्पों के बीच में आस्था के प्रतीक के रूप में रुद्राक्ष का पेड़ लगाया जाएगा.

नवग्रह वाटिका के विशेष पौधे

इसके अलावा नवग्रह वाटिका में ग्रहों के प्रतीक के रूप में विशेष पुष्प और पौधे खिलेंगे, जिनमें पलाश (सोम), दूब (राहु), खैर (मंगल), गूलर (शुक्र), मदार (सूर्य), कुश (केतु), अपामार्ग (बुध), पीपल (गुरु) और शमी (शनि) प्रमुख रूप से शामिल हैं.

डीएफओ की मॉनिटरिंग में होगा निर्माण

इस पूरी योजना का कार्यान्वयन प्रधान मुख्य वन संरक्षक (विकास), बिहार द्वारा अनुमोदित कार्य योजना एवं प्राक्कलन के अनुरूप किया जाएगा. आदेश के अनुसार इस प्रोजेक्ट के लिए राशि राज्य योजना मद से उपलब्ध कराई जाएगी तथा इसके निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी वन प्रमंडल पदाधिकारी (DFO), गोपालगंज होंगे. इस प्रोजेक्ट के धरातल पर उतरने के बाद डुमरिया घाट धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक पर्यटन के नए केंद्र के रूप में उभरेगा.

विभाग द्वारा जारी किए गए कड़े दिशा-निर्देश

निर्माण कार्य के दौरान पारदर्शिता और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए विभाग ने स्पष्ट गाइडलाइन जारी की है.

  • श्रमिकों को श्रम संसाधन विभाग द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी का भुगतान करना होगा.
  • सामग्री और सेवाओं की खरीद बिहार वित्त संशोधन नियमावली, 2024 व अन्य वित्तीय नियमों के तहत होगी.
  • योजना पूरी होने के बाद कार्यस्थल के रंगीन छायाचित्र और स्थल जांच प्रमाण-पत्र प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय को भेजने होंगे.
  • किसी भी प्रकार की अनियमितता मिलने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी और पूरी योजना का विवरण सूचना पट्ट पर प्रदर्शित होगा.

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By Sanjay Kumar Abhay

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