Gopalganj News : मां सिंहासनी के दिव्य दर्शन से निहाल हुए श्रद्धालु, आधी रात को हुई महानिशा पूजा

चैत नवरात्र की अष्टमी के मौके पर शनिवार को थावे मंदिर में मां सिंहासनी का दरबार फूल-पत्तियों और चुनरी से सजावट अलौकिक छटा बिखेर रहा था. दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ लगी रही. कतार में लगकर श्रद्धालु जयकारा लगाते रहे और शीश नवा कर आशीर्वाद मांग कर भक्त निहाल हो उठे.

थावे.चैत नवरात्र की अष्टमी के मौके पर शनिवार को थावे मंदिर में मां सिंहासनी का दरबार फूल-पत्तियों और चुनरी से सजावट अलौकिक छटा बिखेर रहा था. दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ लगी रही. कतार में लगकर श्रद्धालु जयकारा लगाते रहे और शीश नवा कर आशीर्वाद मांग कर भक्त निहाल हो उठे. मां के जयकारे से पूरा थावे गूंजता रहा. इसी प्रकार रहषु मंदिर पर भी दर्शनार्थियों की बड़ी भीड़ रही. नेपाल, यूपी व बिहार के विभिन्न जिलों से मां के भक्त पहुंच कर मां को नारियल, चुनरी, पेड़ा चढ़ा कर अपनी कामना रखते नजर आये. इस बार नवरात्र में भक्तों को दिव्य दर्शन हो इसके लिए प्रशासन ने गर्भगृह के मुख्य गेट को खुलवा दिया है. इससे बहुत ही आसानी से मां की मनोहारी छवि के दर्शन हो रहे हैं. इतना ही नहीं, नये इंतजाम के कारण भक्तों को बहुत ही कम समय में दर्शन हो रहे हैं. इंट्री करते ही उनको मन प्रसन्न करने वाले दर्शन हो रहे हैं. वहीं, विधि-व्यवस्था बनाये रखने के लिए पुलिस बल के साथ ही स्काउट के बच्चे लगाये गये थे. शाम पांच बजे मां के शृंगार के लिए बंद हुआ उसके बाद संध्या आरती के बाद रात के 10 बजे मंदिर को बंद किया गया. मंदिर की साफ-सफाई के बाद मां का शृंगार किया गया. उसके बाद आधी रात को मंदिर के मुख्य पुजारी पं संजय पांडेय, पं मुकेश पांडेय ने महानिशा पूजा करायी. महानिशा पूजा में पं हरेंद्र पांडेय, शिवाकांत पांडेय, गोपाल पांडेय, पं राजन पांडेय समेत प्रमुख पंडा व पुजारियों के द्वारा मां का विधिवत पूजन कराया गया, उसके बाद हथुआ राज की ओर से पहली बलि दी गयी. बलि के बाद आम लोगों के द्वारा बलि देने का सिलसिला शुरू हो गया. वहीं रात के 12:30 बजे मंदिर का पट भक्तों के लिए खोल दिया गया. उसके साथ ही मंदिर परिसर में हवन का कार्य भी शुरू हो गया.

श्रद्धालु आज करें कन्या पूजन, मिलेंगी सभी सिद्धियां

धर्मशास्त्र विशेषज्ञ डॉ पंकज शुक्ला ने लधिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, इशित्व और वशित्व ये आठ सिद्धियां हैं. सभी देवी-देवताओं, गंदर्भ, ऋषि, असुरों को इनकी पूजा करने से ही सिद्धियां प्राप्त होती हैं. जो भी भक्त नवरात्र के नौ दिन उपवास, पूजा-अर्चना और अंत में कन्या पूजन करते हैं, उन पर मां की असीम कृपा प्राप्त होती है और सभी अटके कार्य पूर्ण होते हैं. साथ ही घर परिवार में सुख शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है. माता सिद्धिदात्री को हलवा, पुड़ी, काला चना, मौसमी फल, खीर और नारियल का भोग चढ़ाएं और पारण करें. कन्या पूजन में कन्याओं की संख्या नौ होनी चाहिए. कन्याओं के साथ एक बटुक भैरव भी होना चाहिए. कन्याओं को घर पर आदर-सत्कार के साथ बुलाकर उनके पैरों को जल या दूध से घुलकर कुमकुम व सिंदूर का टिका लगाएं और आशीर्वाद लें. फिर भोजन के लिए कन्या और बटुक भैरव को हलवा-चना, पुड़ी-सब्जी, फल आदि चीजें दें.

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