गोपालगंज के 11 लाख रुपये साइबर ठगी मामले में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, बिना ठोस साक्ष्य आरोपी नहीं बनाया जा सकता

Gopalganj News : पटना हाईकोर्ट ने गोपालगंज के 11 लाख रुपये की साइबर ठगी मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. अदालत ने स्पष्ट किया है कि किसी भी व्यक्ति को केवल सह-आरोपी के आवेदन के आधार पर आरोपी नहीं बनाया जा सकता, जब तक कि ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य मौजूद न हों.

Gopalganj News : गोपालगंज जिले से जुड़े करीब 11 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले में पटना हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. अदालत ने स्पष्ट किया है कि मुकदमे की सुनवाई के दौरान यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ कोई ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य सामने नहीं आता है, तो उसे केवल सह-आरोपी के आवेदन के आधार पर आरोपी के रूप में तलब नहीं किया जा सकता. हाईकोर्ट ने इस मामले में ट्रायल कोर्ट के समन आदेश को रद्द कर दिया.

हथुआ थाना के 11 लाख रुपये ठगी मामले से जुड़ा है प्रकरण

यह मामला गोपालगंज जिले के हथुआ थाना कांड संख्या-106/2015 से संबंधित है. आरोप है कि वर्ष 2015 में एक सेवानिवृत्त शिक्षक के बैंक खाते से आईआरसीटीसी के माध्यम से करीब 11 लाख रुपये की साइबर ठगी की गई थी. मामले की जांच के बाद पुलिस ने राहुल कुमार झा के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया, जबकि याचिकाकर्ता को अभियोजन पक्ष का गवाह बनाया गया.

ट्रायल के दौरान नहीं मिला याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई साक्ष्य

मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के छह गवाहों की गवाही दर्ज की गई. हालांकि, किसी भी गवाह ने याचिकाकर्ता की संलिप्तता का उल्लेख नहीं किया. इसके बावजूद सह-आरोपी की ओर से दायर आवेदन पर ट्रायल कोर्ट ने दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 319 के तहत याचिकाकर्ता को आरोपी के रूप में समन जारी कर दिया.

हाईकोर्ट ने समन आदेश को किया रद्द

न्यायमूर्ति चंद्रशेखर झा की एकलपीठ ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 319 के तहत किसी व्यक्ति को आरोपी बनाने की शक्ति असाधारण है. इसका उपयोग अत्यंत सावधानी के साथ और तभी किया जाना चाहिए, जब ट्रायल के दौरान उसके खिलाफ पर्याप्त एवं विश्वसनीय साक्ष्य उपलब्ध हों. अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ सुनवाई के दौरान कोई भी आपत्तिजनक साक्ष्य सामने नहीं आया. ऐसे में केवल सह-आरोपी के आवेदन के आधार पर समन जारी करना कानून की कसौटी पर खरा नहीं उतरता.

सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों का भी दिया हवाला

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सर्वोच्च न्यायालय भी अपने कई निर्णयों में स्पष्ट कर चुका है कि केवल संदेह के आधार पर किसी व्यक्ति को धारा 319 के तहत आरोपी नहीं बनाया जा सकता. इसके लिए ऐसे मजबूत और विश्वसनीय साक्ष्य आवश्यक हैं, जिनसे प्रथम दृष्टया उसकी संलिप्तता सिद्ध होती हो.

2018 का समन आदेश निरस्त, याचिका मंजूर

इन्हीं तथ्यों के आधार पर पटना हाईकोर्ट ने 13 जुलाई 2018 को ट्रायल कोर्ट द्वारा पारित समन आदेश को निरस्त कर दिया और याचिकाकर्ता की याचिका स्वीकार कर ली. इस फैसले को धारा 319 के प्रयोग की कानूनी सीमा स्पष्ट करने वाला महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है.

Also Read : सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी और नीट मुद्दे पर माकपा का प्रदर्शन, पीएम मोदी व शिक्षा मंत्री का फूंका पुतला



प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Yuvraj Ratan

पटना जन्मस्थली है मेरी, निष्पक्ष, तथ्यात्मक और जनहित आधारित पत्रकारिता में विश्वास करता हूं. वर्तमान में मेरा उद्देश्य बिहार के स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता से उठाना और पाठकों तक सत्यापित जानकारी पहुंचाना है. किसी भी समाचार को प्रकाशित करने से पहले उपलब्ध तथ्यों और स्रोतों का सत्यापन करना मेरी प्राथमिकता है. पाठकों को विश्वसनीय, निष्पक्ष और जनहितकारी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध हूं.

प्राथमिक शिक्षा संत जेवियर्स हाई स्कूल, पटना से पूरी करने के बाद संत जेवियर्स कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नॉलजी से बैचलर्स ऑफ मास कम्यूनिकेशन से स्नातक किया हूं. 2020 से पटना स्थित मीडिया संस्थान न्यूज 4 नेशन में एंकर सह प्रोड्यूसर के पद पर डेढ़ वर्षों तक काम किया. इसके उपरांत जून 2022 से इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमिटी (I-PAC) में सीनियर एग्जीक्यूटिव के पद पर रहते हुए डिजिटल कम्यूनिकेशन टीम में कार्य करने का मौका मिला. वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर के पद पर हूं इसके माध्यम से नागरिकों के पास तथ्यात्मक और सही सूचनाएँ, खबर और अपडेट देने का कार्य कर रहा हूं.

और पढ़ें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >