गोपालगंज. डकैती के दौरान हत्याकांड में 42 वर्ष के बाद कोर्ट से नोटिस मिलने के बाद 76 वर्षीय जलेश्वर प्रसाद सिंह शुक्रवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-10 मानवेंद्र मिश्र के कोर्ट में अपनी गवाही देने के लिए पहुंचे थे. कोर्ट को बताया कि हुजूर जवान थे, तब डकैती के दौरान हत्या की घटना हुई थी. कांड में इंसाफ की उम्मीद में बूढ़ा हो गया. यह गवाही दूसरी बार देने पहुंचे थे. इससे पहले 34 वर्ष की उम्र में गवाही दर्ज कराया था.
प्रभात खबर में छपने के बाद गवाही देने आये जलेश्वर प्रसाद
अपर लोक अभियोजक जयराम साह ने बताया कि यह घटना प्रभात खबर में छपने के बाद गवाही देने के लिए जलेश्वर प्रसाद आये हैं. उनकी बयान को दर्ज कराया गया है. ध्यान रहे कि उचकागांव थाना के लखना खास गांव में 2-3 दिसंबर 1983 की आधी रात में हथियारों से लैस डकैतों ने जयराम सिंह के घर पर डकैती के लिए धावा बोल दिया. लूटपाट के दौरान परिवार के लोगों को बंधक बना लिया गया. आवाज सुनकर जब पलानी में सो रहे जय राम सिंह निकले, तो भाला मार दिया गया. उसके बाद गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी.
पांच नामजद अभियुक्तों की हो चुकी है मौत
चश्मदीद बेटा, पत्नी व अन्य की आंखों के सामने कांड हुआ. सबसे बड़ा बेटा पारसनाथ तब 23 वर्ष के थे. उनकी तहरीर पर उचकागांव थाना कांड 153/1983 दर्ज कराया गया. कांड में डकैतों को पहचान लिया गया था. अब इस कांड में अभियुक्त लखना गांव के ही धर्मनाथ राम, भीमल चौधरी, शाहपुर डेरवां के शिव चौधरी, जिउत चौधरी, मदन चौधरी, नगीना चौधरी, बादशाह चौधरी, बच्चा चौधरी नामजद थे. उनमें से अब महज धर्मनाथ राम, बादशाह चौधरी व मदन चौधरी जीवित हैं. बाकी पांच नामजद अभियुक्तों की मौत हो चुकी है.
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