Gopalganj News: (सुरेश कुमार राय) गोपालगंज जिले के भोरे प्रखंड के तिवारी चकिया गांव के रहने वाले मनीष तिवारी आज पूरे उत्तर प्रदेश में “पेड़ वाले बाबा” के नाम से पहचाने जाते हैं. हरे रंग की साइकिल पर अपना सामान लेकर चलने वाले मनीष तिवारी वर्षों से अकेले ही पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता का अभियान चला रहे हैं. जहां लोग कूड़ा फेंकते हैं, वहां वे सफाई कर पौधे लगाते हैं और उन्हें पेड़ बनने तक उनकी देखभाल करते हैं.
लगभग तीन दशक पहले गोपालगंज से निकलकर लखनऊ पहुंचे मनीष तिवारी ने अपना पूरा जीवन वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण को समर्पित कर दिया. उनका मानना है कि यदि धरती पर हरियाली रहेगी, तो पर्यावरण सुरक्षित रहेगा और लोग स्वस्थ जीवन जी सकेंगे.
कूड़े के ढेर को बना देते हैं हरियाली की बगिया
लखनऊ की सड़कों पर भगवा वस्त्र पहने और साइकिल पर कचरे का ड्रम लेकर चलते मनीष तिवारी अक्सर दिखाई दे जाते हैं. वे उन स्थानों का चयन करते हैं जहां गंदगी और कूड़े का अंबार लगा हो. पहले उस जगह की सफाई करते हैं, फिर वहां पौधे लगाकर नियमित रूप से उनकी देखभाल करते हैं.
इन दिनों वे गोमती नदी के किनारे स्थित गुलाला घाट श्मशान मार्ग पर पौधरोपण कर रहे हैं. जिस स्थान पर कभी नगर निगम की गाड़ियां कूड़ा फेंकती थीं, वहां आज दर्जनों पौधे लहलहा रहे हैं. पेड़ वाले बाबा प्रतिदिन वहां पहुंचकर पौधों को पानी देते हैं और उनकी सुरक्षा के लिए आवश्यक उपाय करते हैं.
गोपालगंज से शुरू हुआ सफर
मनीष तिवारी मूल रूप से गोपालगंज जिले के भोरे प्रखंड अंतर्गत तिवारी चकिया गांव के निवासी हैं. उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की पढ़ाई की. तीन भाइयों में सबसे छोटे मनीष के उज्ज्वल भविष्य को लेकर परिवार की बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन उन्होंने सांसारिक जीवन के बजाय समाज और पर्यावरण की सेवा का रास्ता चुना. जैन धर्म के प्रवर्तक भगवान महावीर के विचारों से प्रेरित होकर उन्होंने वृक्षारोपण को अपना मिशन बना लिया. आज वे बिना किसी सरकारी सहायता या चंदे के अपने निजी श्रम से पर्यावरण संरक्षण का कार्य कर रहे हैं.
भाई बोले- बचपन से ही समाज सेवा की थी सोच
पेड़ वाले बाबा के बड़े भाई बागीश तिवारी बताते हैं कि मनीष बचपन से ही प्रकृति और समाज सेवा के प्रति संवेदनशील थे.परिवार चाहता था कि वे अच्छी नौकरी करें और अपना करियर बनाएं, लेकिन उन्होंने अलग रास्ता चुना.
बागीश तिवारी कहते हैं कि मनीष ने हमेशा समाज के लिए कुछ अलग करने की सोच रखी. परिवार को उम्मीद थी कि वे नौकरी करेंगे, लेकिन उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को अपना जीवन बना लिया. आज जिस तरह वे हजारों लोगों को पेड़ लगाने और पर्यावरण बचाने की प्रेरणा दे रहे हैं, उस पर पूरे परिवार और गोपालगंज को गर्व है.
‘एकला चलो’ की राह पर
मनीष तिवारी का मानना है कि पौधारोपण केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें पेड़ बनने तक संरक्षित करना भी उतना ही जरूरी है. वे कहते हैं कि इस काम में निरंतरता और समर्पण चाहिए. हर किसी के साथ आने का इंतजार नहीं किया जा सकता, इसलिए वे अकेले ही अपने मिशन में जुटे हुए हैं.
आज गोपालगंज का यह बेटा उत्तर प्रदेश में हरियाली की अलख जगा रहा है और हजारों लोगों के लिए प्रेरणा बन चुका है . उसकी साइकिल पर भले ही घर चलता हो, लेकिन उसका सपना आने वाली पीढ़ियों के लिए हरा-भरा भविष्य तैयार करना है.
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