Gopalganj News (अजीत द्विवेदी) : पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने के उद्देश्य से पंचायतों में मनरेगा के तहत सड़कों के किनारे बड़े पैमाने पर पौधरोपण कराया गया था. पौधों की सुरक्षा के लिए गैबियन भी बनवाये गये थे, ताकि पशुओं से बचाव हो सके और पौधे सुरक्षित तरीके से विकसित हो सकें. लेकिन, सिस्टम की उदासीनता और निगरानी के अभाव में यह पूरा अभियान अब दम तोड़ता नजर आ रहा है. अधिकांश जगहों पर पौधे सूख चुके हैं, जबकि कई स्थानों पर बनाये गये गैबियन भी टूटकर बर्बाद हो गये हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि पौधरोपण के नाम पर सरकारी राशि खर्च तो कर दी गयी, लेकिन पौधों की देखरेख की कोई व्यवस्था नहीं की गयी.
दम तोड़ रही हरियाली योजना
शुरुआत में कुछ दिनों तक पानी देने और सुरक्षा की औपचारिकता निभायी गयी, लेकिन बाद में संबंधित पदाधिकारी व जनप्रतिनिधि अपनी जिम्मेदारी भूल गये. नतीजा यह हुआ कि बड़ी राशि खर्च कर लगाये गये पौधे धीरे-धीरे सूखते चले गये. अब कई सड़कों के किनारे सिर्फ सूखे डंठल और टूटे गैबियन ही नजर आते हैं. कुछ जगहों पर तो गैबियन भी नजर नहीं आ रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि विभागीय रिकॉर्ड में आज भी इन योजनाओं को सफल दिखाया जा रहा है. कागजों पर हरियाली बरकरार है, लेकिन जमीन पर कहीं पौधे दिखाई नहीं दे रहे.
पौधों की खरीद और रखरखाव के नाम पर खर्च, परिणाम शून्य
पौधों की खरीद, सुरक्षा और रखरखाव के नाम पर राशि की निकासी तो हुई, लेकिन वास्तविक कार्य मानक के अनुरूप धरातल पर नहीं हुआ. विभागीय रिकॉर्ड में कार्य जरूर दिखा, लेकिन धरातल पर स्थिति बहुत अच्छी नहीं रही. काम के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की गयी. कई पंचायतों में एक ही जगह पर तीन-तीन बार पौधरोपण दिखाये जाने की चर्चा है. इस बात की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है, लेकिन जांच का विषय जरूर है.
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