कटेया. जब-जब धरती पर अधर्म का बढ़ता है, तब-तब भगवान का किसी ना किसी रूप में अवतार होता है. जिससे असुरों का नाश होता है और अधर्म पर धर्म की विजय. भगवान चारों दिशाओं के कण-कण में विद्यमान हैं. इन्हें प्राप्त करने का मार्ग मात्र सच्चे मन की भक्ति ही है. त्रेता युग में जब असुरों की शक्ति बढ़ने लगी, तो माता कौशल्या की कोख से भगवान राम का जन्म हुआ.
आज का युवा पाश्चात्य सभ्यता के भंवर में फंसा
ये बातें कटेया प्रखंड की अमेया पंचायत के समऊर के लोकनाथ श्रीविष्णु धाम मंदिर के परिसर में संत शिरोमणि बाबा विशंभर दासजी महाराज के सान्निध्य में आयोजित श्री रुद्र महायज्ञ के चौथे दिन मानस मर्मज्ञ परम पूज्य अतुल कृष्ण भारद्वाज ने कहीं. उन्होंने कहा कि भगवान सर्वत्र हैं. प्रेम से पुकारने व सच्चे मन से सुमिरन करने पर कहीं भी प्रकट हो सकते हैं. देश की युवा पीढी पर घोर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज का युवा पाश्चात्य सभ्यता के भंवर में फंसा हुआ है. उसे कृष्ण, राम व सीता के साथ भारतीय सभ्यता से मतलब नहीं है. उन्होंने माताओं से आग्रह किया कि यदि माताएं चाहें, तो युवा पाश्चात्य सभ्यता से अलग हो सकता है.
भजन सुनते ही झूम उठे श्रद्धालु
वहीं, भगवान राम के जन्म की व्याख्या के दौरान जैसे ही कथा व्यास ने भजन गाया, तो श्रोता झूम उठे. ऐसा लग रहा था कि मानो सचमुच पंडाल में भगवान का जन्म हुआ हो. यज्ञ को सफल बनाने के लिए अवधकिशोर सिंह, अनूप मिश्र शुभम, नन्हे सिंह, दिनेश सिंह, विनोद सिंह, प्रेम तिवारी, वीरेंद्र सिंह, धनंजय सिंह, दीपक सिंह, रामेश्वर प्रसाद, जटा गौड़, मुक्ति गौड़, दीनानाथसिंह, आनंद,अवनीश, विपिन, विकास, मुन्ना, मोतीला, गोलू सिंह, अनमोल, आदर्श, आदित्य, गोलू, विकास, दीपक,दीनदयाल समेत कई युवा दिन रात मेहनत कर रहे हैं.
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