(गोपालगंज से विकास दुबे की रिपोर्ट)
Gopalganj News: गोपालगंज शहर के गांधी इंटर कॉलेज में वित्तीय अनियमितताओं के मामले की जांच अब तेज हो गई है. बिहार सरकार के वित्त विभाग ने कॉलेज में विशेष अंकेक्षण (ऑडिट) कराने का आदेश जारी कर दिया है. इसके तहत वित्त विभाग की तीन सदस्यीय टीम 4 जून को गांधी कॉलेज पहुंचकर वर्षों पुराने वित्तीय रिकॉर्ड और अनुदान राशि के खर्च की जांच करेगी. जांच का दायरा कई शैक्षणिक सत्रों तक फैला हुआ है, जिससे मामले को लेकर कॉलेज प्रशासन और शिक्षा विभाग में हलचल बढ़ गई है. वित्त विभाग अंकेक्षण निदेशालय द्वारा जारी आदेश में बताया गया है कि गांधी इंटर कॉलेज में वर्ष 2008-10, 2009-11, 2013-15 और 2014-16 के दौरान हुए वित्तीय लेन-देन की विशेष जांच की जाएगी. जांच के दौरान सरकारी अनुदान की प्राप्ति, उसके उपयोग, भुगतान से जुड़े दस्तावेज, कैशबुक, बैंक रिकॉर्ड तथा अन्य वित्तीय अभिलेखों का मिलान किया जाएगा.
माध्यमिक शिक्षा निदेशालय की अनुशंसा पर बनी जांच टीम
विभागीय आदेश के मुताबिक यह कार्रवाई माध्यमिक शिक्षा निदेशालय की अनुशंसा के बाद की गई है. वित्तीय अनियमितता से जुड़े आरोपों की जांच के लिए सारण और पटना प्रमंडल के अंकेक्षण अधिकारियों की संयुक्त टीम गठित की गई है. टीम में एक वरीय अंकेक्षक और दो अंकेक्षक शामिल हैं, जिन्हें निर्धारित अवधि के सभी अभिलेखों की जांच कर रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है. जांच दल को कॉलेज से संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है. साथ ही टीम अपनी जांच रिपोर्ट विभागीय मुख्यालय को सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी. विशेष अंकेक्षण दल कॉलेज में प्राप्त सरकारी अनुदान, विकास मद में खर्च की गई राशि, भुगतान संबंधी दस्तावेज, बैंक अभिलेख, कैशबुक और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की जांच करेगा. टीम यह पता लगाएगी कि विभिन्न मदों में प्राप्त राशि का उपयोग निर्धारित नियमों के अनुरूप किया गया या नहीं. इसके लिए कॉलेज प्रशासन से सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा गया है.
सरकारी राशि के उपयोग की होगी बारीकी से पड़ताल:-
अंकेक्षण दल कॉलेज को मिली सरकारी अनुदान राशि, विभिन्न मदों में हुए खर्च, भुगतान प्रक्रिया, बैंक खातों के संचालन, कैशबुक, वाउचर, रजिस्टर और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की विस्तार से जांच करेगा. टीम यह भी देखेगी कि संबंधित अवधि में प्राप्त राशि का उपयोग निर्धारित नियमों और सरकारी प्रावधानों के अनुरूप किया गया था या नहीं. जांच के दौरान दस्तावेजों का मिलान किया जाएगा तथा खर्च और भुगतान से जुड़े तथ्यों का सत्यापन भी किया जाएगा. यदि किसी प्रकार की विसंगति, अनियमितता या नियमों के उल्लंघन की बात सामने आती है तो उसे जांच रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा.
सारण और पटना प्रमंडल के अधिकारियों को सौंपी गई जिम्मेदारी
वित्त विभाग ने जांच के लिए सारण प्रमंडल और पटना प्रमंडल के अंकेक्षण अधिकारियों की संयुक्त टीम गठित की है. टीम में एक वरीय अंकेक्षक और दो अंकेक्षक शामिल हैं. विभागीय आदेश के अनुसार जांच कार्य का पर्यवेक्षण भी विभागीय स्तर से किया जाएगा ताकि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से पूरी हो सके. संबंधित कॉलेज प्रशासन को सभी आवश्यक अभिलेख और दस्तावेज उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है. साथ ही जांच दल को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वह जांच पूरी कर विस्तृत प्रतिवेदन विभागीय मुख्यालय को सौंपे.
जाँच रिपोर्ट के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई
शिक्षा विभाग और वित्त विभाग के अधिकारियों की नजर इस जांच पर टिकी हुई है. माना जा रहा है कि विशेष अंकेक्षण रिपोर्ट आने के बाद पूरे मामले की तस्वीर साफ होगी. यदि जांच में वित्तीय गड़बड़ी, सरकारी राशि के दुरुपयोग, नियमों की अनदेखी या अन्य अनियमितताओं की पुष्टि होती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है. जरूरत पड़ने पर अन्य कानूनी कदम भी उठाए जा सकते हैं. गांधी इंटर कॉलेज जिले के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में शामिल है. ऐसे में वित्त विभाग द्वारा कराई जा रही यह विशेष जांच शिक्षा जगत में चर्चा का विषय बनी हुई है. वर्षों पुराने वित्तीय मामलों की जांच शुरू होने से अब यह उम्मीद की जा रही है कि कॉलेज के वित्तीय प्रबंधन से जुड़े सभी तथ्यों की निष्पक्ष पड़ताल होगी और यदि कहीं कोई गड़बड़ी हुई है तो वह सामने आ सकेगी.
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