पुलिस के चालान से बचने के लिए नहीं, अपनी सुरक्षा के लिए सड़क सुरक्षा नियमों का करें पालन

Gopalganj News: सड़क पर निकलते ही अक्सर एक परिचित दृश्य देखने को मिलता है. ट्रैफिक पुलिस को देखकर बाइक सवार अचानक ब्रेक लगा देते हैं सड़क सुरक्षा नियमों का करें पालन

Gopalganj news: (प्रशांत पाठक की रिपोर्ट) सड़क पर निकलते ही अक्सर एक परिचित दृश्य देखने को मिलता है. ट्रैफिक पुलिस को देखकर बाइक सवार अचानक ब्रेक लगा देते हैं, यू-टर्न लेकर दूसरी दिशा में भागने लगते हैं या जल्दबाजी में हेलमेट और सीट बेल्ट ठीक करने लगते हैं. यह दृश्य एक कड़वी सच्चाई को उजागर करता है कि लोगों को अपनी जान से ज्यादा चालान का डर सताता है.

सड़क सुरक्षा नियम सरकार का राजस्व बढ़ाने या लोगों को परेशान करने के लिए नहीं बनाए गए हैं। इनका उद्देश्य केवल इतना है कि घर से निकला हर व्यक्ति सुरक्षित अपने परिवार तक वापस पहुंच सके। जब तक लोग सड़क सुरक्षा को कानूनी मजबूरी नहीं बल्कि अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेंगे, तब तक सड़क हादसों पर अंकुश लगाना मुश्किल होगा.

आंकड़ों का खौफनाक सच

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार भारत में हर वर्ष लगभग 1.5 लाख से अधिक लोग सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवा देते हैं. इसका अर्थ है कि हर घंटे कई परिवार सड़क हादसों की वजह से अपनों को खो रहे हैं.

चिंताजनक बात यह है कि इन दुर्घटनाओं में 70 प्रतिशत से अधिक पीड़ित 18 से 45 वर्ष आयु वर्ग के युवा होते हैं, जो अपने परिवार और समाज की रीढ़ माने जाते हैं. इन हादसों की प्रमुख वजह ओवरस्पीडिंग, हेलमेट नहीं पहनना, शराब पीकर वाहन चलाना और ड्राइविंग के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल करना है.

चालान से ज्यादा कीमती है जिंदगी

यातायात नियमों के उल्लंघन पर भारी जुर्माने का प्रावधान है.कई लोग इसे लेकर शिकायत करते हैं, लेकिन एक सवाल हर व्यक्ति को खुद से पूछना चाहिए कि क्या उसकी जिंदगी की कीमत एक हजार या पांच हजार रुपये के चालान से भी कम है.

दुर्घटना में सिर पर गंभीर चोट लगने से बिना हेलमेट चलने वाले कई लोगों की मौके पर ही मौत हो जाती है या वे जीवनभर के लिए दिव्यांग हो जाते हैं. ऐसे समय में जुर्माना नहीं, बल्कि पूरा परिवार संकट में पड़ जाता है.

सड़क सुरक्षा के बुनियादी नियम जो बचा सकते हैं जान

सड़क पर थोड़ी सी सावधानी बड़े हादसों को टाल सकती है। इसके लिए कुछ सामान्य नियमों का पालन बेहद जरूरी है.

हेलमेट और सीट बेल्ट का करें नियमित उपयोग

हेलमेट और सीट बेल्ट पुलिस से बचने के लिए नहीं बल्कि अपनी जान बचाने के लिए हैं। दुर्घटना कहीं भी और कभी भी हो सकती है.

लाल बत्ती का सम्मान करें

रात के समय सड़क खाली होने पर भी रेड लाइट पार नहीं करनी चाहिए। खाली सड़कें कई बार अधिक खतरनाक साबित होती हैं क्योंकि वहां वाहन तेज गति से चलते हैं.

लेन ड्राइविंग और इंडिकेटर का प्रयोग करें

मुड़ने से पहले हमेशा इंडिकेटर दें और अपनी लेन में चलें। अचानक लेन बदलना दुर्घटनाओं का बड़ा कारण बनता है.

पैदल यात्रियों को दें प्राथमिकता

जेब्रा क्रॉसिंग पर पैदल चलने वालों का पहला अधिकार होता है। वाहन चालकों को वहां रुककर उन्हें सुरक्षित रास्ता देना चाहिए.

मानसिकता बदलने की जरूरत

हमारे समाज में कई बार नियम तोड़ने को बहादुरी समझ लिया जाता है। नाबालिग बच्चों को वाहन सौंप देना, बिना लाइसेंस गाड़ी चलाना, पकड़े जाने पर रसूख दिखाना या रिश्वत देकर बचने की कोशिश करना सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति हमारी लापरवाही को दर्शाता है.

अक्सर लोग पुलिस को देखकर हेलमेट पहन लेते हैं और आगे बढ़ते ही उसे उतार देते हैं। लेकिन सड़क पर मौजूद गड्ढे, तेज रफ्तार वाहन या अनियंत्रित ट्रक यह नहीं देखते कि आपने हेलमेट पुलिस के डर से पहना है या अपनी सुरक्षा के लिए.

जिम्मेदार नागरिक बनने का समय

यातायात नियमों का पालन तभी प्रभावी होगा जब वह हमारी आदत और संस्कृति का हिस्सा बने. इसके लिए किसी कैमरे या पुलिसकर्मी की मौजूदगी जरूरी नहीं होनी चाहिए.

जब आप घर से निकलते हैं तो कोई आपकी सुरक्षित वापसी का इंतजार कर रहा होता है। आपके माता-पिता, जीवनसाथी, बच्चे और परिजन आपके लिए चिंतित रहते हैं। उनके लिए आप केवल एक व्यक्ति नहीं बल्कि पूरा संसार हैं.

सड़क सुरक्षा नियम कानून जरूर हैं, लेकिन वास्तव में ये सुरक्षित जीवन की गारंटी हैं. चालान के डर से नियमों का पालन करना मजबूरी हो सकती है, लेकिन अपनी सुरक्षा के लिए नियमों का पालन करना एक जिम्मेदार और जागरूक नागरिक की पहचान है.

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लेखक के बारे में

Published by: Vivek Pandey

विवेक रंजन पांडेय का जन्म और पालन-पोषण बिहार के गौरवशाली इतिहास और ज्ञान की भूमि नालंदा में हुआ. इसी पावन धरती के संस्कारों ने उन्हें समाज और व्यवस्था को गहराई से देखने का नजरिया दिया. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को करियर बदलने के लिए उन्होंने पटना के आर्यभट्ट विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. पिछले 7 वर्षों से टीवी चैनल के जरिए रिपोर्टिंग फील्ड में लगातार सक्रिय हैं. Network 10 National News Channel से करियर की शुरुआत की. उसके बाद कई संस्थानों में काम किया. शिक्षा और राजनीति के साथ कृषि, महिला सुरक्षा से जुड़े मुद्दे पर विशेष रूचि रखते हैं. पत्रकारिता की बारीकियों को सीखा और ग्राउंड जीरो पर रहकर जनता से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया. वर्तमान में Prabhat Khabar के माध्यम से बिहार की खबरों को एक नया आयाम दे रहे हैं. वे बिहार की राजनीति के साथ-साथ देश की सियासी हलचलों पर भी पैनी नजर रखते हैं. अपने शानदार करियर में उन्होंने ​बिहार के वर्तमान मुख्यमंत्री जब वह उप मुख्यमंत्री थे तब इंटरव्यू किया. इसके साथ कैबिनेट के अधिकांश प्रमुख मंत्रियों का विशेष इंटरव्यू किया है. ​बिहार के शीर्ष नेताओं और नौकरशाहों को बहुत करीब से देखा, समझा और उनकी नीतियों का निष्पक्ष विश्लेषण किया. ​जटिल राजनीतिक घटनाक्रमों को बेहद सरल भाषा में जनता के सामने पेश किया है.

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