गोपालगंज के स्कूलों में अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी की तैयारी तेज

Gopalganj News : विद्यालय और अभिभावकों के साझा प्रयास से मजबूत होगा बच्चों का विकास : डीइओ

Gopalganj News (विकास दुबे) : गोपालगंज जिले के सभी सरकारी प्रारंभिक विद्यालयों में 30 मई को “मानसिक स्वास्थ्य एवं भावनात्मक कल्याण” विषय पर विशेष अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी (पीटीएम) आयोजित की जायेगी. शिक्षा विभाग के निर्देश के बाद जिलेभर के विद्यालयों में इसकी तैयारी शुरू कर दी गयी है. कार्यक्रम को लेकर शुक्रवार को जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीइओ) योगेश कुमार ने ऑनलाइन समीक्षा बैठक की. बैठक में सभी उच्च माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापक, प्रभारी प्रधानाध्यापक, प्राथमिक व मध्य विद्यालयों के प्रधान शिक्षक, सीआरसी समन्वयक तथा शिक्षा विभाग के अन्य अधिकारी जुड़े. बैठक में डीइओ ने कहा कि इस बार की पीटीएम केवल औपचारिकता नहीं होगी, बल्कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक मजबूती और बेहतर शैक्षणिक माहौल तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित होगी. उन्होंने निर्देश दिया कि प्रत्येक विद्यालय में छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों की शत-प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित की जाये. उन्होंने यह भी कहा कि ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान बच्चों की पढ़ाई बाधित नहीं होनी चाहिए. इसके लिए विद्यालयों द्वारा बच्चों को होमवर्क दिया जायेगा और अभिभावकों को घर पर बच्चों की पढ़ाई की निगरानी करने के लिए प्रेरित किया जायेगा.

गोपालगंज के स्कूलों में अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी की तैयारी तेज

डीइओ ने बताया कि प्राथमिक शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी मार्गदर्शिका में कहा गया है कि बच्चों के सर्वांगीण विकास में विद्यालय और अभिभावकों दोनों की जिम्मेदारी समान रूप से महत्वपूर्ण है. विभाग ने माना है कि कई बार बच्चे पढ़ाई के दबाव, डांट-फटकार, तुलना और संवाद की कमी के कारण मानसिक रूप से कमजोर महसूस करने लगते हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए इस बार पीटीएम की थीम “मानसिक स्वास्थ्य एवं भावनात्मक कल्याण” रखी गयी है. विद्यालयों में शिक्षकों द्वारा “सूखा पौधा” कहानी सुनाकर अभिभावकों को समझाया जायेगा कि जैसे किसी पौधे को केवल धूप नहीं, बल्कि पानी की भी जरूरत होती है, उसी प्रकार बच्चों को सिर्फ किताब और स्कूल नहीं, बल्कि प्यार, संवाद और भावनात्मक सहयोग की भी आवश्यकता होती है. शिक्षकों को निर्देश दिया गया कि वे स्थानीय भाषा और आसान उदाहरणों के माध्यम से अभिभावकों को बच्चों की मानसिक स्थिति को समझने के लिए प्रेरित करें. अभिभावकों को यह भी बताया जायेगा कि बच्चों की छोटी उपलब्धियों की सराहना करें, उनकी बातों को ध्यान से सुनें और उन्हें बार-बार डांटने या दूसरे बच्चों से तुलना करने से बचें.

अभिभावकों से होगा व्यक्तिगत संपर्क

डीइओ ने विद्यालयों को निर्देश दिया है कि अधिक से अधिक अभिभावकों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाये. इसके तहत बच्चों के माध्यम से निमंत्रण पत्र भेजे जायेंगे. साथ ही व्हाट्सएप संदेश, माइकिंग, टोला संपर्क, बाल संसद, मीना मंच और विद्यालय शिक्षा समिति की मदद से अभिभावकों तक सूचना पहुंचायी जायेगी. विशेष रूप से अनियमित, ड्रॉपआउट और दिव्यांग बच्चों के अभिभावकों से व्यक्तिगत संपर्क कर उन्हें पीटीएम में शामिल होने के लिए प्रेरित करने का निर्देश दिया गया है. विभाग का मानना है कि ऐसे बच्चों को विद्यालय से जोड़ने में अभिभावकों की सक्रिय भूमिका सबसे अधिक महत्वपूर्ण होती है.

‘स्टूडेंट ऑफ द मंथ’ और ‘पैरेंट ऑफ द मंथ’ सम्मान से बढ़ेगा उत्साह

डीईओ ने बताया कि सभी विद्यालयों में वर्गवार पीटीएम आयोजित होगी. इसमें बच्चों की पढ़ाई, उपस्थिति, व्यवहार और प्रगति रिपोर्ट अभिभावकों के साथ साझा की जायेगी. साथ ही विद्यालय की उपलब्धियों और चुनौतियों की जानकारी भी दी जायेगी. पीटीएम के दौरान बेहतर प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को “स्टूडेंट ऑफ द मंथ” और विद्यालय को विशेष सहयोग देने वाले अभिभावकों को “पैरेंट ऑफ द मंथ” सम्मान से सम्मानित किया जायेगा. विद्यालयों को सुझाव एवं शिकायत पंजी रखने का भी निर्देश दिया गया है, ताकि अभिभावकों की समस्याओं और सुझावों को दर्ज किया जा सके.

पढ़ाई का माहौल बनाने पर रहेगा विशेष जोर

पीटीएम में अभिभावकों को बच्चों के लिए घर में पढ़ाई का अलग कोना बनाने, प्रतिदिन कम से कम एक घंटा पढ़ाई के लिए बैठाने और 15 से 20 मिनट तक बोल-बोलकर पढ़ने के लिए प्रेरित करने की सलाह दी जायेगी. इसके अलावा अभिभावकों से कहा जायेगा कि वे मोबाइल और टीवी का समय सीमित करें तथा बच्चों के साथ अधिक समय बितायें. विभाग ने यह भी कहा है कि बच्चों को पौष्टिक भोजन देकर साफ-सुथरे यूनिफॉर्म में नियमित रूप से विद्यालय भेजना भी जरूरी है.

मानसिक स्वास्थ्य पर केंद्रित पीटीएम को सफल बनाने में जुटा शिक्षा विभाग

ऑनलाइन बैठक के दौरान डीइओ योगेश कुमार ने स्पष्ट निर्देश पर प्राथमिक या मध्य विद्यालय के प्रधानाध्यापक या प्रधान शिक्षक अपने निजी मोबाइल से मीटिंग में शामिल नहीं हुए बल्कि मध्य विद्यालय के एचएम या प्रधान शिक्षक अपने-अपने सीआरसी केंद्र से ही जुड़ कर मीटिंग में शामिल हुए. डीइओ द्वारा मीटिंग के माध्यम से बताया गया कि सभी विद्यालयों को पीटीएम के बाद उपस्थिति और फीडबैक रिपोर्ट ऑनलाइन गूगल फॉर्म के माध्यम से अपलोड करने का निर्देश भी दिया है. साथ ही कम उपस्थिति वाले अभिभावकों से दोबारा संपर्क कर उन्हें विद्यालय गतिविधियों से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया है. उनका कहना है कि विद्यालय और अभिभावकों के साझा प्रयास से ही बच्चों का मानसिक, शैक्षणिक और सामाजिक विकास मजबूत किया जा सकता है.

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