गोपालगंज. सदर अस्पताल के मनोचिकित्सा विभाग में तैनात जीएनएम को कार्य स्थल पर प्रताड़ित करने व अभद्रता करने का आरोप जांच में प्रथम द्रष्टया सत्य पाया गया है. जांच में आरोप के सही पाये जाने पर डीएम प्रशांत कुमार सीएच एक्शन मोड में आ गये.
जीएनएम की लिखित शिकायत पर हुई कार्रवाई
डीएम के आदेश पर सिविल सर्जन डॉ बीरेंद्र प्रसाद ने तत्काल प्रभाव से मनोरोग सोशल वर्कर अभिषेक कुमार व नैदानिक मनोविज्ञानी रत्नेश्वर पांडेय को हटाते हुए हथुआ अनुमंडलीय अस्पताल में प्रतिनियोजित किया है. यह कार्रवाई जीएनएम की लिखित शिकायत को गंभीरता से लेते हुए डीएम ने की. उन्होंने महिला एवं बाल विकास निगम की टीम गठित की थी.
गठित टीम ने कई दिनों तक की जांच
जांच टीम ने कई दिनों तक पूरे मामले की जांच की. जांच में आरोपों को प्रथम द्रष्टया सही पाया गया. उसके बाद ज्ञापांक 305 दिनांक- 25 फरवरी से तत्काल प्रभाव से दोनों आरोपितों को स्थानांतरित करने का आदेश दिया था. उसके बाद सिविल सर्जन ने आपन-फानन में हथुआ अनुमंडलीय अस्पताल में पद नहीं रहने के बाद भी प्रतिनियोजित कर दिया है. मामले की जांच अभी जारी है. जीएनएम का आरोप था कि जब उसके द्वारा निर्धारित काम को गाइडलाइन के अनुरूप किया जा रहा था, तो उसपर बाजार से दवाएं मंगाने से लेकर और भी गड़बड़ी करने के लिए दबाव बनाया जा रहा था. जब इन्कार किया, तो उसे टारगेट कर प्रताड़ित किया जाने लगा. इतना ही नहीं, इन लोगों ने जीएनएम को अपने से बोर्ड बना कर पागल भी घोषित कर दिया था. डीएम ने पूरे मामले को गंभीरता से लेकर जब जांच करायी, तो सच खुलकर सामने आने लगा है.
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